
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर में ई-रिक्शा की धमाचौकड़ी एवं मोटर व्हीकल एक्ट से छूट मामले में सरकार को जवाब पेश करने के लिए अंतिम मोहलत दी है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि ई-रिक्शों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे ट्रैफिक में समस्या पैदा हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद सरकार ई-रिक्शा को दी गई छूट को वापिस लेने पर विचार करे। बेंच ने असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल को कहा कि वे इस संबंध में केंद्र सरकार को से निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराएं। अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से याचिका दायर की गई। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि भारत सरकार ने 2018 में एक अधिसूचना जारी कर मोटर व्हीकल एक्ट के नियम 66 के तहत ई.रिक्शा व बैटरी चलित वाहनों को छूट दी है। याचिका में नियम में किए गए संशोधन की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि यह संशोधन मोटर वीकल एक्ट के मूल स्वरूप का उल्लंघन कर किया गया है। इस संशोधन के चलते ई-रिक्शॉ चलाने के लिए चालक को आरटीओं से ड्रायविंग लायसेंस और परमिट की आवश्यकता नहीं होती। चूंकि कानून में इनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, इसलिए बेधडक़ इनका संचालन बढ़ रहा है। कई ई-रिक्शातो नाबालिग तक चला रहे हैं। ई-रिक्शा की अराजकता के चलते कुछ दिन पहले कलेक्टर ने हस्तक्षेप करते हुए स्कूलों में इन पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी।
