
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने अजाक्स के अध्यक्ष आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ दायर याचिका पर कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई करना प्रशासनिक अधिकारियों का विशेषाधिकार है। कोर्ट सरकार को किसी के खिलाफ एनएसए की कारवाई के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इस संबंध में पहले से एफआईआर दर्ज है। इसलिए अलग से कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में कानून अपना काम करेगा। उक्त मत के साथ एसीजे विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने दायर याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता जबलपुर के वकील अभिषेक दुबे की जनहित याचिका मे कहा गया कि अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वर्मा ने ब्राह्मण समाज को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे सामाजिक विद्वेष की स्थिति उत्पन्न हो गई। तर्क दिया गया कि यह बयान प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिससे मध्य प्रदेश सहित देशभर के ब्राह्मण समाज में आक्रोश व्याप्त है। याचिका में वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
