
बड़वानी। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार, अवैध खनन, भूमि उपयोग परिवर्तन, धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता तथा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे मुद्दों पर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है।
मीडिया से चर्चा करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए भूमि आवंटन संबंधी आरोपों के दस्तावेजों की जांच कराने पर यह सामने आया कि संबंधित भूमि एक सरकारी ट्रस्ट को आवंटित की गई है, जिसके पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। उन्होंने कहा कि इस तथ्य से स्थिति स्पष्ट हो गई है, लेकिन इससे प्रदेश में सामने आ रहे अन्य गंभीर मामलों से ध्यान नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध रेत खनन, अवैध शराब कारोबार, कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग के लिए परिवर्तन तथा सड़क निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि बड़वानी जिले के सरदार सरोवर डूब क्षेत्र के बरदा गांव में अवैध रेत खनन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
दिग्विजय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए उनकी आय-व्यय व्यवस्था सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने राम मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त चंदे के कथित दुरुपयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की तथा कहा कि विधि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद आवश्यकता पड़ने पर जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की जाएगी।
यूसीसी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि सभी धर्मों, समुदायों और सामाजिक संगठनों से व्यापक संवाद एवं सहमति के बिना इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार पर उठे गंभीर प्रश्नों का तथ्यात्मक और सार्वजनिक जवाब दिया जाना आवश्यक है।
