बुलडोजर एक्शन के बाद 75 परिवार हुए बेघर, गुस्साए लोगों ने कार्यवाही पर खड़े किए सवाल

ग्वालियर: अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन में शहर में एक ही झटके में 75 घर तोड़े गए हैं। ऐसे में बेघर हुए लोगों का गुस्सा फूट रहा है। कार्रवाई के दौरान महिलाओं और पुरुषों ने जमकर हंगामा किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से उनकी तीखी बहस भी हुई। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है।
याचिकाकर्ता पर कोर्ट को गुमराह करने और राजनीतिक रसूख का आरोपबेघर हुए पीड़ित लोगों ने इस कार्रवाई के पीछे एक गहरी साजिश का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासी विनोद भदौरिया, छोटू तोमर, पवन पीड़ित और राकेश तोमर आदि का कहना है कि वे कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन याचिकाकर्ता नरेश अग्रवाल ने हाईकोर्ट को गुमराह कर यह आदेश हासिल किया है। निवासियों के मुताबिक, उद्योग विभाग ने सालों पहले नरेश अग्रवाल को व्यापार के लिए यहां जमीन लीज पर दी थी। यह पूरा विवाद उसी जमीन के एप्रोच रोड को लेकर है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि पहुंच मार्ग पहले से ही 60 फीट चौड़ा है, जो कहीं-कहीं थोड़ा कम हो सकता है। इसके बावजूद, याचिकाकर्ता जानबूझकर इस पूरी जगह को खाली करवाना चाहता है ताकि वह इस सरकारी जमीन को भी अपने कब्जे में ले सके।नारायण विहार के निवासियों ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता नरेश अग्रवाल उद्योग विभाग से मिली लीज की जमीन पर अवैध व्यापार कर रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस और खुद उद्योग विभाग को इस सच्चाई की पूरी जानकारी है, लेकिन नरेश अग्रवाल के मजबूत राजनीतिक रसूख और आर्थिक दबदबे के कारण उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। स्थानीय लोगों ने रुआंसे होकर कहा कि वे यहाँ पिछले 20 से 25 सालों से निवास कर रहे हैं, तब प्रशासन को कभी यह अतिक्रमण नजर नहीं आया। आज सिर्फ एक रसूखदार और पैसे वाले व्यक्ति के दबाव में आकर गरीबों के आशियाने उजाड़ दिए गए। यहाँ रहने वाले अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं, जिनके पास अब रहने को कोई जगह नहीं बची है।
न्यायालय का आदेश था, पहले ही दिया था समय: एसडीएम
दूसरी तरफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि यहाँ निवासरत लोगों को अचानक नहीं हटाया गया है, बल्कि उन्हें बहुत पहले ही नोटिस देकर सूचित कर दिया गया था।

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