पुराने पर दांव या नए चेहरों की एंट्री, सियासी गलियारों में तेज कानाफूसी

विंध्य की डायरी

डा. रवि तिवारी
दिल्ली से लेकर भोपाल तक मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सत्ता के गलियारों में तरह-तरह के समीकरण गढ़े जा रहे हैं. खासकर विंध्य क्षेत्र को लेकर चर्चा और भी दिलचस्प है. क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पहले से मंत्रिमंडल में है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या पुराने चेहरे बरकरार रहेंगे या संगठन इस बार किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगा? राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार परफॉर्मेंस, संगठन की रिपोर्ट और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर फैसले हो सकते हैं. इसलिए कुछ मौजूदा मंत्रियों की धडक़नें भी बढ़ी हुई बताई जा रही हैं. वहीं दावेदारों के समर्थक अपने-अपने नेताओं का नाम आगे बढ़ाने में जुटे हैं. भाजपा के अंदरखाने की एक पुरानी कहावत इन दिनों फिर चर्चा में है ‘जिसका नाम सबसे ज्यादा चलता है, कई बार अंतिम सूची में वही नहीं दिखता.’ यही वजह है कि सियासी गलियारों में कानाफूसी है कि कहीं कुछ लोग जानबूझकर मजबूत दावेदारों के नाम हवा देकर उनकी दावेदारी कमजोर करने का खेल तो नहीं खेल रहे. फिलहाल न दिल्ली ने पत्ते खोले हैं, न भोपाल ने, लेकिन विंध्य में चर्चा यही है कि इस बार मंत्रिमंडल में नया चेहरा चमकेगा या पुराने चेहरे ही अपनी कुर्सी बचाने में सफल होंगे.

परिक्रमा, पैरवी और गणित… आखिर किसके सिर सजेगा ताज?

सिंगरौली पुलिस महकमे में इन दिनों वर्दी से ज्यादा चर्चा चौकी प्रभारी की कुर्सियों की है. करीब एक पखवाड़े से निवास और गोभा पुलिस चौकियां प्रभारीविहीन हैं, जिससे इन पदों पर तैनाती को लेकर कई उप निरीक्षक पूरे उत्साह के साथ ‘दौड़’ में बताए जा रहे हैं. कोई अनुभव का तराजू लेकर चल रहा है तो कोई संपर्कों की सीढिय़ां नाप रहा है. उधर इस बात की चर्चाएं खूब चल रही है कि प्रभारी मंत्री के यहां से तीन-तीन उप निरीक्षकों के नाम प्रस्तावित होने की चर्चाएं भी महकमे के गलियारों में खूब तैर रही हैं, जिससे समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं.
कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि कई स्तरों पर पैरवी और गुणा-भाग का दौर जारी है, लेकिन अंतिम मुहर अब तक नहीं लग पाई और जय विजय से कौन पर पाएगा यह तो वक्त ही बताएगा . नतीजा यह कि एसपी कार्यालय में भी असमंजस का माहौल बना हुआ है. नवागत पुलिस अधीक्षक जिले के हालात और प्रशासनिक समीकरणों को समझने में जुटे हैं, इसलिए तबादला सूची फिलहाल फाइलों में ही टहलती नजर आ रही है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर किसकी मेहनत, किसकी पैरवी और किसका भाग्य चौकी प्रभारी की कुर्सी तक पहुंचता है. फिलहाल पुलिस महकमे में चर्चा का बाजार गर्म है और सबकी निगाहें बहुप्रतीक्षित सूची पर टिकी हैं. और इन पुलिस कर्मियों के नाम से विधायक भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं.

डीएमएफ का धन, विकास कहीं और… अब किसे दें जवाब?

सिंगरौली की धरती खनिज उगलती है, धूल-धुआं यहां के लोग झेलते हैं, लेकिन विकास का खजाना कहीं और लुट रहा है! यह सनसनीखेज दावा कर आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव राजेश सोनी ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है. आरटीआई से जुटाए गए दस्तावेजों का हवाला देते हुए उनका आरोप है कि सिंगरौली के डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) का करीब एक हजार करोड़ रुपये प्रदेश के दूसरे जिलों में खर्च कर दिया गया. अब जनाब… सवाल तो उठेंगे ही. जिस जिले की सडक़ें गड्ढों से भरी हों, अस्पताल संसाधनों के लिए तरस रहे हों और विस्थापित आज भी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हों, वहां का विकास फंड दूसरे जिलों की तस्वीर बदलने में कैसे लग गया? राजेश सोनी इसी सवाल को लेकर सरकार पर रोज नए तीर चला रहे हैं और जिलों की सूची के साथ खर्च का ब्यौरा भी सामने रख रहे हैं. सियासी गलियारों में चर्चा गर्म है कि अगर आरोपों में दम निकला तो जवाब देना आसान नहीं होगा. अब निगाहें सरकार पर हैं कि वह इन दावों का तथ्यात्मक जवाब देती है या फिर यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक ताप बढ़ाएगा.

Next Post

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा कोई वकील, अयोध्या बार एसोसिएशन का कड़ा फैसला, जुर्माने की चेतावनी

Mon Jun 29 , 2026
अयोध्या | अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में एसआईटी द्वारा 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद, फैजाबाद एडवोकेट्स एसोसिएशन ने बड़ा ऐलान किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने स्पष्ट कर दिया है कि शहर का कोई भी […]

You May Like