
छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव ब्लॉक स्थित बीरपुरा प्राथमिक शाला से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां सरकार शिक्षा पर लाखों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता बेहद कमजोर बताई जा रही है। स्कूल में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार कुल 22 छात्र नामांकित हैं, जबकि प्रतिदिन औसतन केवल 15 बच्चे ही कक्षाओं में उपस्थित रहते हैं।
हैरानी की बात यह है कि इतने कम छात्रों को पढ़ाने के लिए स्कूल में तीन शिक्षक पदस्थ हैं। प्रत्येक शिक्षक का औसत वेतन लगभग 70 हजार रुपए प्रतिमाह बताया जा रहा है, यानी सरकार केवल वेतन मद में हर महीने करीब 2 लाख 10 हजार रुपए खर्च कर रही है। इस हिसाब से देखा जाए तो एक छात्र की पढ़ाई पर लगभग 13 हजार रुपए प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं, फिर भी बच्चों का शैक्षणिक स्तर अपेक्षित नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चों को प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिले के कलेक्टर का नाम तक ज्ञात नहीं है। इतना ही नहीं, स्कूल के एक शिक्षक को भी प्रदेश और देश के शिक्षा मंत्रियों के नाम की जानकारी नहीं थी, जिससे शिक्षण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित होकर रह गई है। नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता मूल्यांकन और जवाबदेही की कमी के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति पर ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे।
