कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा दिन है। राज्य के मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने घोषणा की है कि सोमवार को राज्य विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य बंगाल को उन राज्यों की सूची में शामिल करना है, जिन्होंने समान नागरिक संहिता को अपनाया है। इस कदम से शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों में एकरूपता आएगी, जो धर्मनिरपेक्ष आधार पर सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे।
राजनीतिक समर्थन और सुरक्षा के तर्क
इस प्रस्तावित कानून का भाजपा विधायकों ने पुरजोर समर्थन किया है। विधायक सरबोरी मुखर्जी ने कहा कि राज्य में डेमोग्राफी में आए बदलाव और सुरक्षा संबंधी मुद्दों से निपटने के लिए UCC एक अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और वैचारिक प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए कहा कि यह कानून राज्य की सीमाओं पर शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होगा। पार्टी का मानना है कि यह कदम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो एक राष्ट्र-एक कानून की वकालत करते थे।
अन्य राज्यों का मॉडल और भविष्य की राह
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बंगाल में लागू होने वाला UCC मॉडल गुजरात, उत्तराखंड और असम की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसके क्रियान्वयन की बारीकियों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है। गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात और असम में यह कानून प्रभावी हो चुका है, जबकि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र भी इसी दिशा में सक्रिय हैं। आज विधानसभा में पेश होने वाले इस बिल पर विस्तृत चर्चा की संभावना है, जो राज्य के भविष्य के कानूनी ढांचे को नई दिशा देगा।

