
प्रवेश कुमार मिश्र नई दिल्ली।कांग्रेस पार्टी में संगठन का सबसे बड़ा और निर्णायक पुनर्गठन आरंभ हो गया है. कहा जा रहा है कि सांगठनिक सर्जरी के माध्यम से पार्टी यह सीधा संदेश देना चाहती है कि अब पार्टी में केवल वफादारी व गणेश परिक्रमा नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस व जवाबदेही ही पद पर बने रहने का एकमात्र पैमाना होगी. इतना ही नहीं संगठन पुनर्गठन में महिलाओं, युवाओं के साथ-साथ बहुजन विचार व जनसंख्या के आधार पर सामाजिक समीकरण को साधते हुए सांगठनिक लोकतंत्र को मजबूत किया जाएगा.
पिछले दिनों अचानक उत्तर प्रदेश, हरियाणा व उड़िसा के लिए नए प्रभारी की नियुक्ति कर पार्टी ने अपनी भावी रणनीति को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रभारियों की नियुक्ति में भी स्थानीय समीकरणों को महत्व दिया जाएगा. सूत्रों की माने तो उदयपुर चिंतन शिविर के 50 अंडर 50 यानी 50 फीसदी पद 50 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को सौंपने के सिद्धांत और जितनी आबादी, उतना हक के नारे को अब पहली बार पार्टी के आंतरिक ढांचे में कड़ाई से लागू किया जा रहा है. पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में सभी 60 सचिवों और प्रभारियों के साथ मैराथन बैठकें की थी. उस बैठक का उद्देश्य साफ था कि पिछले छह महीनों का लिखित रिपोर्ट कार्ड और परफॉर्मेंस की समीक्षा होगी और उसी आधार पर उनका भविष्य तय होगा. उस बैठक के बाद से ही कहा जा रहा था कि लगभग छह महासचिवों जिसमें रमेश चेन्निथला व बी.के. हरिप्रसाद भी शामिल हैं, सात प्रदेश प्रभारियों और तीस से ज्यादा सचिवों को पदमुक्त किया जाएगा. इसके अलावा लगभग आधा दर्जन प्रदेश अध्यक्षों की भी छुट्टी हो सकती है.
सूत्रों की माने तो अशोक गहलोत,अविनाश पांडेय,भूपेश बघेल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे कुछ वरिष्ठ नेताओं को मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु व महाराष्ट्र का प्रभार दिया जा सकता है. इतना ही नहीं बिहार, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल,असम समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है.
चर्चा है कि राहुल गांधी के विशेष प्रयास से इस फेरबदल का सबसे रणनीतिक और क्रांतिकारी हिस्सा संगठन के अंदर सामाजिक न्याय यानी दलित और ओबीसी समुदाय को विशेष तवज्जो देना है.
इसकी झलक उत्तर प्रदेश जैसे चुनावी राज्य में अचानक आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में आए दलित चेहरा राजेन्द्र पाल गौतम को नया प्रभारी नियुक्त करने से मिल रही है. वैसे भी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से बसपा संस्थापक कांशीराम की प्रशंसा कर दलितों में यह संदेश दिया था कि कांग्रेस अब उनके स्वाभिमान के साथ खड़ी है. इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक मॉडल की काट और आगामी 2027 चुनावों में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने बहुजन विचार अभियान शुरू किया है. इसके तहत छत्रपति शाहू जी महाराज की नीतियों को वैचारिक आधार बनाया जा रहा है.
वैचारिक बदलाव का संकेत
कांग्रेस का यह फेरबदल महज़ कुछ चेहरों को इधर से उधर करना नहीं, बल्कि एक गहरे वैचारिक बदलाव का संकेत है. क्योंकि पार्टी अब समझ चुकी है कि केवल संविधान खतरे में है का नारा चुनाव नहीं जिता सकता, बल्कि संगठन के भीतर वरिष्ठों के साथ युवाओं, महिलाओं और वंचितों को भी सत्ता का वास्तविक हिस्सा देना होगा.
