सिंगरौली: जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी द्वारा 25 जून को जारी उस आदेश पर, जिसमें बिना सक्षम अनुमति पत्रकारों एवं आम नागरिकों के विद्यालय में प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, महज 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण जारी कर दिया गया। पहले आदेश के सार्वजनिक होने के बाद पत्रकार संगठनों, सामाजिक संगठनों और आमजन ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद 26 जून को शिक्षा विभाग ने आदेश की मंशा स्पष्ट करने का प्रयास किया।
स्पष्टीकरण पत्र में कहा गया है कि आदेश का उद्देश्य मीडिया की भूमिका को सीमित करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा तथा शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है और निर्देश केवल बाहरी व्यक्तियों अथवा कथित “इन्फ्लुएंसर्स” के प्रवेश को विनियमित करने के लिए जारी किए गए थे।
हालांकि, पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है कि यदि मूल आदेश स्पष्ट था, तो अगले ही दिन स्पष्टीकरण जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। मूल आदेश में “मान्यता प्राप्त पत्रकार” या “इन्फ्लुएंसर्स” जैसे शब्दों का उल्लेख नहीं था, बल्कि “पत्रकारों एवं सामान्य जन” के प्रवेश पर सक्षम अनुमति की बात कही गई थी। वहीं “सक्षम अधिकारी” कौन होगा, इसका भी उल्लेख नहीं किया गया था। ऐसे में अब आदेश और स्पष्टीकरण के बीच अंतर को लेकर बहस तेज हो गई है। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और मीडिया की भूमिका को लेकर उठे सवालों के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग मूल आदेश में संशोधन करता है या केवल स्पष्टीकरण के आधार पर विवाद को समाप्त करने का प्रयास करेगा
