मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा
जबसे सहकारिता मंत्रालय का केंद्रीय कमान अमित शाह के हाथ में आई है तब से मध्य प्रदेश की सहकारिता राजनीति में एक नया उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ है। उन्होंने पिछले साल भोपाल में एक कार्यक्रम में सहकारिता को मजबूत बनाने और किसानों की माली हालत सुधारने को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की थी। सहकारिता के क्षेत्र में सैकड़ों करोड़ निवेश के प्रस्ताव भी मिले हैं। सहकारिता विभाग की गतिविधियों का मुख्य आधार चार हजार से ज्यादा सहकारी संस्थाएं हैं। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश में वर्षों से जबर्दस्त राजनीति होती रही है। इसलिए कांग्रेस फिर उस तरह की राजनीति को अपनाने जा रही है जो उसे सत्ता तक पहुंचा सके। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस अपनी इस योजना को परवान चढ़ाने में कितना सफल हो पाती है.
आगामी सहकारी समितियों के चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘सहकारिता समन्वय समिति’ का गठन किया है, जिसे राजनीतिक गलियारों में ‘सात रत्नों की टीम’ के रूप में देखा जा रहा है। ये सात सदस्य न केवल अनुभवी राजनेता हैं, बल्कि सहकारिता आंदोलन की आत्मा से गहराई से जुड़े हुए दिग्गज हैं। इस समन्वय समिति के सफल गठन में मध्य प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व की दूरदर्शी भूमिका अत्यंत सराहनीय है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपनी सक्रियता और समन्वय क्षमता का परिचय देते हुए इन अनुभवी दिग्गजों को एक मंच पर लाने का कार्य किया है।
उनके इस निर्णय ने न केवल पार्टी में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि कांग्रेस सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को लेकर कितनी गंभीर और संवेदनशील है। समिति के संयोजक के रूप में चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी की नियुक्ति को एक अत्यंत रणनीतिक और सराहनीय निर्णय माना जा रहा है। द्विवेदी का सहकारिता आंदोलन से नाता अत्यंत गहरा और ऐतिहासिक है। उन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने के पीछे कई ठोस कारण हैं. ऐतिहासिक अनुभव- उन्होंने सहकारिता के पुरोधा स्व. सुभाष यादव के साथ साये की तरह रहकर इस आंदोलन को जमीनी मजबूती दी है।
एपेक्स बैंक और मार्कफेड जैसी संस्थाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है, जिससे उन्हें सहकारिता के कामकाज का गहरा अनुभव है। उन्हें सहकारिता के क्षेत्र में पाँच देशों की विदेश यात्राओं का अनुभव प्राप्त है, जो उन्हें आधुनिक और वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करता है। नेतृत्व क्षमता- उनकी निष्ठा, कार्यकुशलता और सहकारिता के प्रति अटूट समर्पण ही है कि उन्हें इस महत्वपूर्ण सात सदस्यीय टीम का ‘संयोजक’ बनाकर पार्टी ने भविष्य के बड़े लक्ष्यों को साधने का संकल्प लिया है। सात रत्न और उनकी क्षमता समिति में शामिल प्रत्येक सदस्य की अपनी अनूठी कार्यक्षमता और अनुभव है, जो उन्हें सहकारिता के क्षेत्र का वास्तविक रत्न बनाता है:- अरुण यादव: म.प्र. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उनकी संगठनात्मक क्षमता और किसानों के मुद्दों को मुखरता से उठाने का कौशल किसी से छिपा नहीं है।
अशोक सिंह: राज्यसभा सांसद और एपेक्स बैंक के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने वित्तीय और सहकारी प्रबंधन की जो गहरी समझ विकसित की है, वह इस चुनाव में पार्टी के लिए अमूल्य है। डॉ. गोविंद सिंह: पूर्व सहकारिता मंत्री के रूप में उनका दीर्घकालीन अनुभव और प्रशासन पर पकड़ समिति को एक सशक्त और अनुभवी दिशा प्रदान करती है। भगवान सिंह यादव: पूर्व मंत्री के रूप में उनके पास ग्रामीण विकास और सहकारी ढांचे का व्यापक अनुभव है, जो कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भंवर सिंह शेखावत: एक अनुभवी विधायक के तौर पर वे जमीनी हकीकत और चुनावी रणनीतियों के माहिर खिलाड़ी हैं। चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी: सहकारिता आंदोलन का गहरा अनुभव रखने वाले एक कुशल रणनीतिकार।
वीरेन्द्र गिरी गोस्वामी: पूर्व अध्यक्ष, म.प्र. राज्य वन उपज संघ के रूप में उनकी कार्यशैली और सहकारिता में लंबी निष्ठा उन्हें अत्यंत विश्वसनीय बनाती है। कांग्रेस एक सशक्त भविष्य की रखने जा रही नींव पार्टी का स्पष्ट उद्देश्य इन अनुभवी हाथों के माध्यम से संगठन की विचारधारा को मजबूती प्रदान करना और किसानों के हितों एवं सहकारिता व्यवस्था को सशक्त बनाना है। इन ‘सात रत्नों’ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी सहकारिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह समिति निश्चित रूप से राज्य में सहकारिता आंदोलन को आधुनिक युग की चुनौतियों के अनुरूप पुनर्जीवित और सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए यह एक नई शुरुआत है, जो आगामी चुनावों में सकारात्मक परिणामों की नींव रखेगी।
