नाले में कचरा और बीच में दीवार: अधूरी सफाई से जनता में डर, फिर डूबेगा भोपाल टॉकीज चौराहा

विजय शर्मा

भोपाल: शहर में प्रतिवर्ष बारिश के दौरान जल भराव की स्थिति उत्पन्न होती है. जिससे जनता तो परेशान होती ही है साथ ही प्रशासनिक अमला भी इस व्यवस्था में लगाया जाता है. यही स्थिति इस बार फिर से निर्मित होने की संभावना दिखाई दे रही है. इसके लिए नवभारत संवाददाता ने भोपाल टाकीज क्षेत्र में नालों की सफाई व्यवस्था देखी, साथ ही वहां के व्यापारियों से भी वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त की. सेफिया कॉलेज का नाला बाल विहार रहवासी क्षेत्र से गुजरता है जो हमीदिया रोड के नीचे से इब्राहिम गंज से होते हुए डीआईजी बंगले से आगे छोला की तरफ जाता है.

सेफिया कॉलेज से हमीदिया रोड तक कचरा भरा पड़ा है. इस क्षेत्र में नाले की सफाई नहीं की गई. वहीं हमीदिया रोड के नीचे लगभग 150 फुट नाला दुकानों और रोड के नीचे है. जहां पर भी पूरी तरह से सफाई होती नहीं है. वहां के कुछ व्यापारियों ने बताया कि कुछ दिन पहले रोड किनारे दोनों तरफ बने चेंबर से लगभग दो डंपर कचरा निकाला गया था. जो कि पर्याप्त सफाई का नहीं है. रोड के नीचे नाले की गहराई लगभग 15 फुट और चौड़ाई लगभग 8 फुट है जिसे आज तक पूरा साफ नहीं किया गया. आगे बताया कि इब्राहिम गंज में नाले की सफाई जेसीबी से की गई जहां से भारी मात्रा में कचरा निकाला गया है.
सेफिया कॉलेज बाल विहार से आता है कचरा
भोपाल टाकीज के चौराहे पर चारों तरफ से पानी आता है. जिस वजह से जल भराव की स्थिति बन जाती है. इस नाले से जलभराव की स्थिति अधिक बनती है. बारिश शुरू होते ही नाले की पुलिया और बाल विहार के पूरे क्षेत्र मेें नाले की सफाई नहीं होने से भोपाल टाकीज चौराहे पर जल भराव की स्थिति बनेगी. ऊपर से नाले का कचरा पुलिया में आकर भर जाएगा और पानी अधिक आने से निकल नहीं सकेगा. जो ओवर फ्लो होकर सडक़ और चौराहे पर इकट्ठा होगा. वहीं चौराहे पर नालियां बनी है उनकी भी सफाई नहीं हुई है. तो उनसे पानी नहीं निकल पाता है, साथ ही शाहजहांनाबाद क्षेत्र छोटे तालाब का ऑवर फ्लो होकर पूरा पानी भोपाल टाकीज चौराहे पर आता है.
शहर अतिसंवेदनशील नाले जिनसे होता है जलभराव
वैसे तो राजधानी में छोटे बड़े नाले लगभग 775 हैं. जिनमें से संवेदनशील लगभग 200 हैं. वहीं सबसे खतरनाक अति संवेदनशील 28 नाले हैं, यह अति संवेदनशील 28 नाले शहर में बारिश के दौरान तबाही मचा देते हैं. इनकी पूरी तरह से सफाई हुई नहीं है इसका अंदाजा भोपाल टाकीज के नाले को देखकर लगाया जा सकता है. शहर के कुछ प्रमुख अतिसंवदेनशील भोपाल टाकीज, टीला जमालपुरा, शिवाजी नगर स्थित 6 नबंर, राहुल नगर, कोटरा सुल्टानाबाद, बाणगंगा, जोगी पुरा, बाग मुफ्ति साहब, महामाई, बाग उमराव, प्रभात चौराहा, बैरागढ़, साकेत नगर, जहांगीराबाद, कोलार, करोंद, छोला क्षेत्र सहित अन्य नाले भी हैं.
सांसद और विधायक बैठे थे पानी में
शहर में जनप्रतिनिधियों ने भी जल भराव को लेकर नगर निगम के प्रति नाराजगी जाहितर की थी. गत वर्ष भोपाल टाकीज पर जल भरव हुआ था जिससे वहां का रास्ता ही बंद हो गया था. जिसकी सूचना सांसद और विधायक को मिली तो वह चौराहे पर ही कुर्सी लगाकर बैठ गए. उसके बाद नगर निगम और प्रशासन ने आनन फानन में वहां पर नालो की सफाई कर जनता को राहत दी थी.
इनका कहना है.
यहां पर मेरा बचपन गुजर गया, जल भराव को देखते हुए. नाले तो बने हैं पर सफाई नहीं होने से जल भराव उत्पन्न होता है. वहां मोतिया तालाव का पानी और मछली के जाल भी बहकर नाले में फस जाते है जिससे पानी नहीं निकल पाता है. प्रशासन को एैसी व्यवस्था करना होगी जिससे यहां के नालों का पानी सीधा छोला क्षे में जाकर निकले.
इमरान खान, मैकेनिक भोपाल टाकीज चौराहा
पुलिया से ऊपर के हिस्से में नाले की सफाई नहीं हुई है. हजो कि बारिश के दौरान पुलिया में कचरा भरने से जल भराव हेागा प्रतिवर्ष यही होता है.
मुकेश कुमार, दुकान वाला, हमीदिया रोड
यहां पर हर साल जल भराव होता है. नाले और पुलिया की सफाई पूरी तरह से नहीं की जाती है. ऊपर से बारिश से कचरा पुलिया मे भर जाता है.जो भोपाल टाकीज चौराहे पर जलभराव का कारण बनता है.
नरेश कुमार, हमीदिया रोड
नाले में सडक़ के दानों तरफ की नालियों को मिलाया गया है उसके बाद नाले की पुलिया के बीच में एक सीसी दीवार खड़ी की गई है जिससे नाले में पानी निकलने में बाधा आती है. वहीं ऊपर से थर्मोकोल बहकर आता है तो पुलिया को जाम करता है. जिससे पानी मेरी दुकान में भर जाता है.
मुकेश भाटिया, विजय स्टेशनरी, हमीदिया रोड

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