सतना: सतना मेडिकल कॉलेज सिंगरौली में पदस्थ होने के बावजूद सतना के एक निजी हास्पिटल में आकर मरीजों के ऑपरेशन करने का मामला अब गर्माता नजर आने लगा है. मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब ऑपरेशन कराने वाले अधिकांश मरीज आयुष्मान कार्ड धारक बताए जाते हैं. लिहाजा अब यह जांच का विषय है कि क्या इस मामले में चिकित्सकों को किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति प्राप्त है, और साथ ही यह भी कि क्या उक्त निजी हास्पिटल में होने वाले ऑपरेशन के रिकार्ड संदेह के दायरे में नहीं आते.प्राप्त जानकारी के अनुसार आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजीव सिंह और एनस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. रंजना सिंह मेडिकल कॉलेज सिंगरौली में पदस्थ हैं. हलांकि इससे पहले दोनों चिकित्सक जिला चिकित्सालय सतना में पदस्थ थे. लेकिन मेडिकल कॉलेज में चयन होने के बाद दोनों का स्थानांतरण सिंगरौली के लिए हो गया. इस मामले का काबिलेगौर पहलू यह है कि दोनों चिकित्सक सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में पदस्थ होने के बावजूद सतना में स्थित एक निजी हास्पिटल में ऑपरेशन करने के लिए नियमित तौर पर आते रहते हैं. यह सिलसिला पिछले 3 महीने से अधिक समय से बदस्तूर जारी है. नियमों की बात की जाए तो मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक किसी निजी संस्थान में सेवाएं दे सकते हैं. लेकिन उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत सश्रम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होती है. अधिकांश मामलों में यही देखा जाता है कि जो चिकित्सक जिस शहर में पदस्थ होता है वे वहीं पर स्थित किसी न किसी निजी हास्पिटल में अपनी सवाएं देते हैं. लेकिन इसके लिए तकरीबन 200 किमी की दूरी तय करने का मामला अपने आप में बिरला ही नजर आता है.
अधिकांश आयुष्मान कार्ड धारक
शहर सहित जिले भर में स्थित किसी भी निजी हास्पिटल के संचालन की अनुमति मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से प्राप्त होती है. इसी कड़ी में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का निजी हास्पिटल में उपचार के मामले में भी निगरानी और अनुमति देने का कार्य सीएमएचओ कार्यालय से ही होता है. मामले का काबिलेगौर पहलू यह भी है कि सतना स्थित निजी हास्पिटल में होने वाले अधिकांश आर्थोपेडिक ऑपरेशन आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों के होते हैं. जिन्हें सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में पदस्थ 2 चिकित्सकों द्वारा किया जाता है. लिहाजा उठ रहे गंभीर सवालों के मद्देनजर यदि संबंधित निजी हास्पिटल में होने वाले ऑपरेशन के रिकार्ड की सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जांच की जाए तो सच सामने आ सकता है. में पदस्थ होने के बावजूद सतना के एक निजी हास्पिटल में आकर मरीजों के ऑपरेशन करने का मामला अब गर्माता नजर आने लगा है. मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब ऑपरेशन कराने वाले अधिकांश मरीज आयुष्मान कार्ड धारक बताए जाते हैं. लिहाजा अब यह जांच का विषय है कि क्या इस मामले में चिकित्सकों को किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति प्राप्त है, और साथ ही यह भी कि क्या उक्त निजी हास्पिटल में होने वाले ऑपरेशन के रिकार्ड संदेह के दायरे में नहीं आते.प्राप्त जानकारी के अनुसार आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजीव सिंह और एनस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. रंजना सिंह मेडिकल कॉलेज सिंगरौली में पदस्थ हैं. हलांकि इससे पहले दोनों चिकित्सक जिला चिकित्सालय सतना में पदस्थ थे.
लेकिन मेडिकल कॉलेज में चयन होने के बाद दोनों का स्थानांतरण सिंगरौली के लिए हो गया. इस मामले का काबिलेगौर पहलू यह है कि दोनों चिकित्सक सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में पदस्थ होने के बावजूद सतना में स्थित एक निजी हास्पिटल में ऑपरेशन करने के लिए नियमित तौर पर आते रहते हैं. यह सिलसिला पिछले 3 महीने से अधिक समय से बदस्तूर जारी है. नियमों की बात की जाए तो मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक किसी निजी संस्थान में सेवाएं दे सकते हैं. लेकिन उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत सश्रम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होती है. अधिकांश मामलों में यही देखा जाता है कि जो चिकित्सक जिस शहर में पदस्थ होता है वे वहीं पर स्थित किसी न किसी निजी हास्पिटल में अपनी सवाएं देते हैं. लेकिन इसके लिए तकरीबन 200 किमी की दूरी तय करने का मामला अपने आप में बिरला ही नजर आता है.
अधिकांश आयुष्मान कार्ड धारक
शहर सहित जिले भर में स्थित किसी भी निजी हास्पिटल के संचालन की अनुमति मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से प्राप्त होती है. इसी कड़ी में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का निजी हास्पिटल में उपचार के मामले में भी निगरानी और अनुमति देने का कार्य सीएमएचओ कार्यालय से ही होता है. मामले का काबिलेगौर पहलू यह भी है कि सतना स्थित निजी हास्पिटल में होने वाले अधिकांश आर्थोपेडिक ऑपरेशन आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों के होते हैं. जिन्हें सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में पदस्थ 2 चिकित्सकों द्वारा किया जाता है. लिहाजा उठ रहे गंभीर सवालों के मद्देनजर यदि संबंधित निजी हास्पिटल में होने वाले ऑपरेशन के रिकार्ड की सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जांच की जाए तो सच सामने आ सकता है.
