लक्जरी गाड़ियां, बाउंसर जैसा रसूख और फर्जी डॉक्टरों की फौज; जानिए कौन है MP का मुन्नाभाई हीरा सिंह?

सीहोर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (आरसीएच) के तहत फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के जरिए सरकारी नौकरी दिलाने वाले बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है. मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड हीरा सिंह कौशल को भोपाल से गिरफ्तार किया है.

आरोपी समीपस्थ ग्राम बिलकिसगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ था और 1 मई से लंबी छुट्टी पर चल रहा था. जांच में सामने आया है कि उसने 12 से अधिक लोगों को फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराकर सरकारी अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में नौकरी दिलवाई है. पुलिस के मुताबिक, दमोह में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे डॉक्टरों की जांच के दौरान यह पूरा नेटवर्क सामने आया. अब पुलिस शिवपुरी, ग्वालियर, मुरैना, धार, मंडला, जबलपुर और सीहोर सहित कई जिलों में पदस्थ संदिग्ध डॉक्टरों की कुंडली खंगाल रही है. अधिकारियों का दावा है कि प्रदेश में 50 से ज्यादा लोग फर्जी डिग्री के जरिए स्वास्थ्य विभाग में नौकरी कर रहे हो सकते हैं.

जांच में पता चला कि हीरा सिंह कौशल ने सबसे पहले अजय मौर्य की फर्जी डिग्री तैयार करवाई थी. इसके बाद अजय के जरिए सचिन यादव और राजपाल गौर समेत कई लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल कर ली. पुलिस को आरोपी के पास से डॉक्टरों की एक सूची भी मिली है, जिसके आधार पर दबिश दी जा रही है।

फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या को गोपनीय सूचना मिली और उन्होंने कुछ डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच करवाई. मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल की जांच में राजपाल गौर का रजिस्ट्रेशन फर्जी निकला. उसने 2018 के पुराने रजिस्ट्रेशन नंबर में बदलाव कर उसे 2023 का दर्शाया था. जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने 8 से 10 लाख रुपए देकर फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का फर्जी रजिस्ट्रेशन खरीदा था। राजपाल गौर और सचिन यादव दमोह के सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लीनिक में कार्यरत थे, जबकि अजय मौर्य पिछले ढाई वर्षों से जबलपुर के एक अस्पताल में डॉक्टर बनकर काम कर रहा था.

पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं. जांच में जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम भी सामने आया है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्रियां कहां तैयार हुईं और अब तक कितने लोगों को बेची गईं. सूत्रों के अनुसार, हीरा सिंह कौशल पहले भी विवादों में रह चुका है. बताया जा रहा है कि बैतूल क्षेत्र में उसकी कार से करोड़ों रुपए बरामद होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, हालांकि अधिकारी इस मामले पर खुलकर कुछ नहीं कह रहे हैं.

रौबदार अंदाज में करता था हीरालाल एंट्री

लोगों के अनुसार, हीरा सिंह कौशल जब भी अस्पताल पहुंचता था, उसके साथ हमेशा युवक-युवतियों का समूह रहता था. वह कभी अकेले ड्यूटी पर नहीं आया और उसका रहन-सहन किसी बड़े अधिकारी जैसा नजर आता था. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने पिछले तीन वर्षों में कई महंगी और लग्जरी गाडिय़ां खरीदी हैं. अब उसके बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है.

 

 

 

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