
मुंबई, 26 जून (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेता अनिल कपूर का मानना है कि आज के दर्शक पारंपरिक ‘हीरो-हीरोइन’ की परिभाषाओं से आगे बढ़ चुके हैं और वे ऐसे किरदारों से जुड़ते हैं जिनमें नेतृत्व, साहस और कहानी को आगे बढ़ाने की क्षमता हो, इसी वजह से वह ‘ऐल्फा’ को लेकर बेहद उत्साहित हैं।अपने लंबे फिल्मी करियर में कई दमदार किरदार निभा चुके अनिल कपूर ने कहा कि बॉलीवुड में आखिरकार ऐसी पॉपकॉर्न एक्शन एंटरटेनर फिल्म बनी है, जिसमें आलिया भट्ट और शर्वरी जैसी दो अभिनेत्रियां एक्शन फिल्म की कमान संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सिनेमा को मेल लीड, फीमेल लीड, हीरो और हीरोइन जैसे तयशुदा लेबल्स के जरिए देखा गया, लेकिन अब दर्शकों की सोच और कहानी कहने का तरीका बदल चुका है। उनके अनुसार, ‘ऐल्फा’ इन पुरानी परिभाषाओं को चुनौती देती है।
अनिल कपूर ने कहा,’ ऐल्फा’ होना कभी भी जेंडर के बारे में नहीं रहा।
यह मौजूदगी, दृढ़ विश्वास, साहस और कहानी को आगे बढ़ाने की क्षमता का प्रतीक है। आज के दर्शक भी किसी श्रेणी या लेबल से नहीं, बल्कि ‘मेन कैरेक्टर एनर्जी’ से जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आज दर्शक सिनेमाघरों में कुछ नया और अलग देखना चाहते हैं और ‘ऐल्फा’ उन्हें ऐसा ही अनुभव देने वाली फिल्म है। एक पिता के रूप में उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी दोनों बेटियों को ऐसी फिल्मों और कहानियों का समर्थन करते देखकर गर्व होता है, जो परंपरागत सोच को चुनौती देती हैं और महिलाओं के लिए नई संभावनाएं खोलती हैं। उन्हें विश्वास है कि ‘ऐल्फा’ एक्शन सिनेमा का नया अध्याय शुरू कर सकती है।
अनिल कपूर ने उम्मीद जताई कि यह फिल्म पर्दे पर नेतृत्व और नायकत्व को देखने के नजरिए में बड़ा बदलाव लाएगी।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि यह पूछने के बजाय कि कोई किरदार मेल लीड है या फीमेल लीड, यह पूछा जाए कि ‘ऐल्फा कौन है?’ भारतीय सिनेमा के लिए यह एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव होगा।उन्होंने कहा कि सिनेमा का भविष्य इस बात में नहीं है कि नेतृत्व करने का मौका किसे मिलता है, बल्कि इस बात में है कि नेतृत्व को जेंडर के आधार पर परिभाषित करने की जरूरत ही समाप्त हो जाए। आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्मित और शिव रवैल के निर्देशन में बनी ‘ऐल्फा’ में बॉबी देओल खलनायक की भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म तीन जुलाई को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
