बीडीए में 18 साल से अवैध प्रमोशन की बैसाखी पर जमे हैं सीईओ के पीए, मंत्रालय का निरस्तीकरण आदेश फाइलों में दबाया

विजय शर्मा भोपाल। भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) में एक कर्मचारी की करीब 18 वर्ष पुरानी पदोन्नति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. शिकायतकर्ताओं का दावा है कि लिपिक पद से स्टेनोग्राफर पद पर दी गई पदोन्नति को शासन स्तर से निरस्त किए जाने के बाद भी कर्मचारी वर्तमान तक उसी पद पर कार्यरत हैं.

दस्तावेजों के अनुसार, बीडीए में कार्यरत जगदीश करंजिया को तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 1 जुलाई 2007 को लिपिक पद से स्टेनोग्राफर पद पर पदोन्नति दिए जाने के आदेश जारी किए गए थे. इस पदोन्नति को लेकर बाद में शासन स्तर पर आपत्ति दर्ज की गई थी.

बताया जाता है कि आवास एवं पर्यावरण विभाग के तत्कालीन उप सचिव द्वारा मार्च 2010 में जारी पत्र में इस पदोन्नति आदेश को नियमों के अनुरूप नहीं बताते हुए निरस्त करने तथा पूर्व स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे. पत्र में उल्लेख किया गया था कि 20 मई 1996 की अधिसूचना के अनुसार इस प्रकार की पदोन्नति का अधिकार मुख्य कार्यपालन अधिकारी को प्राप्त नहीं है.

शासन के पत्र पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शासन से जारी पत्र बीडीए तक पहुंचने के बाद भी उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई. हालांकि इस संबंध में बीडीए प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है

ईओडब्ल्यू में भी की गई थी शिकायत

इस मामले को लेकर नारियलखेड़ा निवासी लवन दास सिंह द्वारा 26 फरवरी 2015 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है. शिकायत के आधार पर तत्कालीन अधिकारियों द्वारा नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था.

सेवानिवृत्ति से पहले फिर उठा मामला

जगदीश करंजिया के 30 जून को सेवानिवृत्त होने की जानकारी के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया है. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पदोन्नति नियम विरुद्ध पाई जाती है और उसे निरस्त किया जाता है तो पदोन्नत पद के आधार पर प्राप्त अतिरिक्त वेतन एवं अन्य लाभों के संबंध में नियमानुसार निर्णय लिया जा सकता है.

अब सवाल यह है कि शासन के कथित निरस्तीकरण आदेश पर बीडीए स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और वर्तमान स्थिति क्या है. इस संबंध में बीडीए प्रशासन और संबंधित कर्मचारी का पक्ष सामने आना बाकी है.

इनका कहना है,

मेरी जानकारी में नहीं है. पुराना मामला है. अभी मेरे संज्ञान में आया है. जो भी उचित हो वह कार्रवाई की जाएगी.

श्यामवीर सिंह, आईएएस, सीईओ भोपाल विकास प्राधिकरण

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