यूएलआई बदलेगा एमएसएमई के कर्ज लेने का तरीका: आरबीआई गवर्नर

कोच्चि, 22 जून (वार्ता) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भरोसा दिलाया कि केंद्रीय बैंक उनके लिए ऋण प्रवाह में आ रही बाधाओं को दूर करेगा और एकीकृत ऋण इंटरफेस (यूएलआई) लागू होने के बाद उनके ऋण लेने की प्रक्रिया बिल्कुल आसान हो जायेगी।

श्री मल्होत्रा ने यहां अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस (27 जून) पर पूरे सप्ताह के लिए आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन के मौके पर कहा कि रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में एमएसएमई के

लिए ऋण उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। गत 31 दिसंबर 2025 तक वाणिज्यिक बैंकों द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को दिया गया कुल ऋण 36.79 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसमें पिछले पांच साल में लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक दर से वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा, “ मैं यह नहीं कहूंगा कि हमने पूरी ऋण आवश्यकता को पूरा कर लिया है। ऐसा नहीं है। लेकिन यह अवश्य कहूंगा कि पिछले कुछ वर्षों में हमने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और पूंजी की आवश्यकता और उपलब्धता के अंतर को तेजी से कम किया है।”

एकीकृत ऋण इंटरफेस (यूएलआई) के बारे में उन्होंने विश्वास जताया कि जिस प्रकार यूपीआई ने देश में धन के लेन-देन को सरल, त्वरित और डिजिटल बना दिया, उसी प्रकार यूएलआई देश में ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को बदल सकता है। यूएलआई के माध्यम से ऋणदाता एमएसएमई की सहमति से उनकी जीएसटी फाइलिंग, बैंक स्टेटमेंट, उपयोगिता रिकॉर्ड, भूमि रिकॉर्ड आदि डिजिटल डेटा को देखकर ऋण मूल्यांकन कर सकते हैं। इससे लंबी कागजी कार्रवाई और भौतिक सत्यापन की आवश्यकता काफी कम हो जायेगी।

उन्होंने वादा किया कि रिज़र्व बैंक एमएसएमई के लिए आवश्यक वित्तीय ढांचा तैयार करता रहेगा, प्रक्रियाओं को सरल बनायेगा और इस क्षेत्र की प्रगति में एमएसएमई के साथ खड़ा रहेगा।

श्री मल्होत्रा ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक स्तर पर एमएसएमई कुल व्यवसायों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा हैं और वैश्विक रोजगार सृजन में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान देते हैं। वे भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 31 प्रतिशत योगदान देते हैं, विनिर्माण उत्पादन में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं और देश के कुल माल निर्यात का लगभग आधा प्रतिनिधित्व करते हैं। वे 32 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का आधार बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े एमएसएमई क्षेत्र की महत्वाकांक्षा, गतिशीलता और उद्यमशीलता का प्रमाण हैं।

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