ग्वालियर/भिंड: ग्वालियर-भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर स्थित चंबल नदी के महत्वपूर्ण पुल में एक बार फिर तकनीकी खराबी सामने आने के बाद भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। पुल में आई खराबी की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा, पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार वर्मा तथा एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
चंबल पुल प्रदेश और उत्तर भारत को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि लगभग हर वर्ष इस पुल में कोई न कोई तकनीकी खराबी सामने आती है। कभी पुल के जॉइंट चटक जाते हैं, कभी संरचना में कंपन महसूस होता है और कभी मरम्मत की आवश्यकता पड़ जाती है। इसके बावजूद ओवरलोड और भारी डंपरों का आवागमन लगातार जारी रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर साल पुल की मरम्मत पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर बार-बार खराबी क्यों आ रही है? क्या निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल नहीं उठते? आखिर वह कौन सी वजह है जिसके कारण यह पुल हर साल मरम्मत मांगता है?विशेषज्ञों का मानना है कि पुलों की आयु बढ़ाने के लिए ओवरलोड वाहनों पर सख्ती जरूरी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हाईवे पर क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले डंपर और ट्रक लगातार देखे जा सकते हैं। ऐसे में पुल की संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ना स्वाभाविक है।
फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर साल मरम्मत के बावजूद चंबल पुल आखिर बार-बार बीमार क्यों पड़ जाता है? और यदि समस्या इतनी गंभीर है तो इसके स्थायी समाधान की दिशा में अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
जनता की मांग है कि पुल की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और ओवरलोड वाहनों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।
