इंदौर: कड़े सुरक्षा इंतजामों और चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के बीच रविवार को नीट परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गई. परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की एंट्री सुबह 11 बजे से शुरू हुई. किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की.परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहा. अभ्यर्थियों को सघन जांच के बाद ही केंद्रों में प्रवेश दिया गया. अधिकांश केंद्रों पर थ्री-लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी. पिछले वर्ष हुए विवादों और अनियमितताओं के बाद इस बार की गई सख्त व्यवस्थाओं को लेकर परीक्षार्थियों ने संतोष व्यक्त किया. छात्रों का कहना था कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उनका विश्वास बढ़ा है.
कलेक्टर ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
कलेक्टर शिवम वर्मा ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया. उन्होंने विद्यार्थियों से चर्चा कर व्यवस्थाओं के संबंध में फीडबैक भी लिया तथा उनकी समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए.
आधार कार्ड भूलने पर पुलिस ने की मदद
पिपरिया निवासी रिया सिलावट, जो इंदौर के एक छात्रावास में रहकर परीक्षा देने आई थीं, परीक्षा केंद्र पहुंचने पर उन्हें पता चला कि वे अपना आधार कार्ड हॉस्टल में भूल गई हैं. पहचान पत्र नहीं होने के कारण उनकी प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी. इस दौरान केंद्र पर मौजूद एक एएसआई ने तत्परता दिखाते हुए उनके आधार कार्ड की प्रति मोबाइल पर उपलब्ध करवाने में सहायता की. इसके बाद उनकी पहचान सत्यापित हुई और वे समय पर परीक्षा में शामिल हो सकीं.
लेट हो रही छात्रा को पुलिस ने पहुंचाया सेंटर
नीट परीक्षा के दौरान एक छात्रा समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने में परेशानी का सामना कर रही थी. सरवटे बस स्टैंड यातायात सहायता केंद्र का निरीक्षण कर रहे यातायात के एडिशनल डीसीपी नरेश बाबू अन्नोटिया को छात्रा और उसके पिता ने बताया कि वे परीक्षा केंद्र के लिए लेट हो रहे हैं. इस पर एडिशनल डीसीपी ने तत्काल उन्हें अपने वाहन से कृषि कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचाया. समय पर सेंटर पहुंचने पर छात्रा और उसके पिता ने पुलिस का आभार व्यक्त किया.
स्कूल स्टॉफ भा रहा मददगार
परीक्षा के दौरान कई छात्र आवश्यक दस्तावेज लाना भूल गए थे, जिनकी सहायता पुलिस और स्कूल स्टाफ ने की. वहीं कुछ अभ्यर्थी गलत परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए, जिसके कारण उन्हें निर्धारित केंद्र तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा. कुछ विद्यार्थी अंतिम समय में केंद्र पहुंचे और गेट बंद होने से पहले उन्हें प्रवेश दिया गया.
छात्रों ने साझा किया परीक्षा का अनुभव
परीक्षा देकर निकली छात्रा सानिया ने बताया कि इस बार का प्रश्नपत्र पिछले पेपर की तुलना में अधिक कठिन था, विशेषकर फिजिक्स सेक्शन. उनका मानना है कि इस बार कटऑफ अपेक्षाकृत कम रह सकती है. उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर दोबारा परीक्षा देना मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण रहा, हालांकि इस बार की व्यवस्था संतोषजनक रही.
नरसिंहगढ़ से परीक्षा देने आई प्रियांशी ने कहा कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के लिए हर परीक्षा समान होती है, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से बेहतर दिखाई दी, जिससे निष्पक्ष परीक्षा का भरोसा बढ़ा है.
इंदौर के छात्र रुद्राक्ष ने बताया कि इस बार की व्यवस्थाएं काफी बेहतर रहीं और ऐसा लगा कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि फिजिक्स का पेपर अपेक्षाकृत कठिन था, जबकि बायोलॉजी सामान्य स्तर की रही. परीक्षा केंद्र बदलने से कुछ असुविधा जरूर हुई.
इंदौर की तनिष्क अग्रवाल ने बताया कि फिजिक्स और केमिस्ट्री अपेक्षाकृत कठिन थीं, जबकि बायोलॉजी का स्तर आसान रहा. उन्होंने कहा कि कम समय के अंतराल में दोबारा परीक्षा की तैयारी करना काफी दबावपूर्ण और मानसिक रूप से थकाने वाला अनुभव रहा.
तालियां बजाकर किया उत्साहवर्धन
परीक्षा समाप्त होने के बाद जैसे ही छात्र-छात्राएं केंद्रों से बाहर निकले, वहां मौजूद अभिभावकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया और उनका स्वागत किया। अभिभावकों का कहना था कि विद्यार्थियों ने एक महीने के भीतर दूसरी बार हृश्वश्वभ् परीक्षा दी है, जो उनके लिए मानसिक और शैक्षणिक रूप से बड़ी चुनौती रही। ऐसे में परीक्षा पूरी करने के बाद बच्चों का हौसला बढ़ाना जरूरी था, क्योंकि यह परीक्षा उनके भविष्य से जुड़ी हुई है।
