अमेरिका-ईरान ने स्विट्जरलैंड में बातचीत के दौरान परमाणु समझौते और लेबनान युद्धविराम पर दिया जोर

ज्यूरिख/बर्गनस्टॉक, 21 जून (वार्ता) अमेरिका-ईरान के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में सीधी बातचीत शुरू होने जा रही है। इसमें पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी वार्ता के नये दौर के लिए इस देश में एकत्र हुए हैं। इस बातचीत का उद्देश्य हाल ही में हस्ताक्षरित 14-सूत्री सहमति पत्र (एमओयू) को लागू करना है। साथ ही, शांति समझौते के दूसरे चरण की ओर बढ़ने के लिए अगले कदमों पर चर्चा करना है, विशेष रूप से परमाणु मुद्दों पर और लेबनान में युद्धविराम हासिल करना है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए प्रारंभिक समझौते के तहत तय की गयी 60 दिनों की समय-सीमा वार्ताकारों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगी। अमेरिका के उप राष्ट्रपति जे डी वेंस रविवार तड़के स्विट्जरलैंड पहुंचे, जबकि ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार देर रात यहां पहुंच गये थे। प्रतिनिधिमंडलों के आज ही ल्यूसर्न के पास बर्गनस्टॉक रिजॉर्ट में मिलने की उम्मीद है। बर्गनस्टॉक वार्ता में मुख्य रूप से तीन मोर्चों पर ध्यान केंद्रित किये जाने की उम्मीद है, अमेरिका-ईरान सहमति पत्र का क्रियान्वयन, लेबनान मोर्चे पर स्थिरता लाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित करने का उपाय। स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले श्री वेंस ने कहा कि ईरान से बातचीत में उनकी शीर्ष प्राथमिकताएं वार्ता का ढांचा तैयार करने में मदद करना, परमाणु मुद्दों पर ‘प्रगति करना’ और लेबनान में युद्धविराम हासिल करना होगा। श्री वेंस ने कहा, “हमारे पास शीर्ष स्तर पर मुख्य राजनीतिक नेतृत्व होगा और फिर निश्चित रूप से तकनीकी टीम धरातल पर काम करती रहेगी।” इस बीच, श्री वेंस स्विट्जरलैंड में केवल ‘एक या दो दिन’ ही रुकेंगे, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इससे ईरान की परमाणु सामग्रियों के प्रबंधन से जुड़ी वार्ताओं में प्रगति होगी।

श्री वेंस ने कहा कि एक प्राथमिकता लेबनान में युद्धविराम पर प्रगति करना भी है, जो एक बार फिर इजरायल के मिसाइल हमलों की चपेट में आ गया है। श्री वेंस ने कहा, “ यह स्थिति ऐसी है, जिसका हमें लगातार प्रबंधन करना होगा।” यह वार्ता अमेरिका-ईरान के बीच 14-सूत्री सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होने के बाद हो रही है। यह सहमति पत्र शत्रुता समाप्त करने और व्यापक राजनीतिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रारंभिक रूपरेखा तैयार करता है, जिसमें लेबनान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। वार्ताकार अब इस समझौते को अमल में लाने के तरीके पर काम करेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ और थल सेनाध्यक्ष एवं रक्षा बल प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर भी स्विट्जरलैंड में हैं। वह मध्यस्थ के रूप में इस उच्च स्तरीय चर्चा में भाग लेंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ इन कार्यक्रमों के लिए ज्यूरिख पहुंच चुके हैं और वह बर्गनस्टॉक में होने वाली क्रियान्वयन वार्ता में शामिल होंगे। पाकिस्तान ने इस पूरे संघर्ष के दौरान मध्यस्थ की भूमिका निभायी है। वह इससे पहले भी अमेरिका-ईरान वार्ता के एक दौर की मेजबानी कर चुका है। इस नवीनतम वार्ता से पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, “ वह ईरान-अमेरिका के बीच समझौतों के क्रियान्वयन का समर्थन करना जारी रखेगा।” पाकिस्तान के अलावा इस वार्ता में कतर भी मध्यस्थ की भूमिका में है। वार्ता का यह नया दौर क्षेत्र में नये सिरे से बढ़े तनाव के बावजूद हो रहा है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लेकर विरोधाभासी रिपोर्टें और लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच जारी लड़ाई शामिल है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों का हवाला देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की बात कही है। उन्होंने अमेरिका-ईरान समझौते के तहत प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर समझौते की मुख्य धाराओं को लागू न करने का आरोप भी मढ़ा।

अमेरिकी सैन्य केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक आवाजाही जारी है। प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने कहा, “यातायात का आवागमन जारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना स्थिति पर पैनी नजर रख रही है। सेंटकॉम ने बताया कि शनिवार को 1.7 करोड़ बैरल से अधिक तेल ले जाने वाले 55 व्यापारिक जहाज इस जलमार्ग से गुजरे। उसने इस बात पर जोर दिया कि इस जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण नहीं है।वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इस रणनीतिक जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मांग की है, :दूसरा पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे।’ उनका यह बयान संकेत देता है कि समझौते का क्रियान्वयन ही विवाद का मुख्य बिंदु रहेगा। लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच जारी झड़पों ने इस वार्ता के राजनयिक रास्ते को जटिल बना दिया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिपोर्ट दी है कि मार्च से अब तक 4,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। सप्ताहांत में भी इजरायली हवाई हमले जारी रहे, जिससे लेबनान में दर्जनों लोगों के हताहत होने की रिपोर्ट है। दूसरी ओर, इजरायल ने कहा है कि उसने हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमले किये और उसे खुद भी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है। समय-समय पर होने वाले युद्धविराम के एलानों के बावजूद दोनों पक्षों में शत्रुता बनी हुई है और वे एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। हिजबुल्लाह का कहना है कि इजरायल के इन अभियानों का उद्देश्य व्यापक अमेरिका-ईरान राजनयिक प्रयासों को कमजोर करना है।

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