भू माफियाओं ने मृत महिला को कागजों में किया जिंदा, 76 लाख की ठगी

जबलपुर: माढ़ोताल थाना अंतर्गत औरिया में स्थित 1.63 करोड़ की जमीन का कोर्ट के फर्जी राजीनामे, आधार कार्ड को एडिट कर एक मृत महिला को कागजों पर जिंदा कर सौदा किया। बुजुर्ग को झांसे में लेकर 76 लाख की ठगी कर दी । जब पीडि़त ने खुद जमीनी स्तर पर जांच की, तो पता चला कि जिस महिला की जमीन की सौदेबाजी हुई उसकी मौत हो चुकी है। जिसके बाद मामला थाने पहुंचा । पुलिस ने लंबी जांच पड़ताल की इसके बाद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई ।
जानकारी के अनुसार जवाहरगंज बड़ा फुहारा निवासी व्यापारी दीपक कुमार टिबरेवाला (57) साल 2023 में निवेश के लिए एक प्रॉपर्टी की तलाश में थे।

प्रॉपर्टी ब्रोकर हजारी चौरसिया के जरिए उनका संपर्क दो शातिर जालसाजों राकेश गुप्ता निवासी शांतिनगर और लखन नायक निवासी आईटीआई, लमती से हुआ। दोनों ने अधारताल पुराना पनागर तहसील के ग्राम ओरिया में स्थित खसरा नंबर 368 की 0.350 हेक्टेयर लगभग 37,660 वर्ग फीट जमीन दिखाई, जो रिकॉर्ड में श्रीमती फूलमती पति स्व. दीनबंधु के नाम दर्ज थी। भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने सिविल कोर्ट के एक फर्जी राजीनामे की कॉपी दिखाई, जिसमें दावा किया गया था कि कोर्ट ने फूलमती के माध्यम से इन दोनों को जमीन बेचने का अधिकार दिया है। जमीन को हड़पने और पीडि़त से पैसे ऐंठने के लिए आरोपियों ने कमला सेन नामक महिला को पैसों का लालच दिया था। आरोपियों ने कमला सेन के असली आधार कार्ड को कंप्यूटर से एडिट कर उस पर फूलमती जोशी नाम लिख दिया, ताकि वह असली भू-स्वामी नजर आए।
एडवांस में ऐंठे 51 लाख, हड़ताल का बनाया बहाना
कोर्ट के कागजात देखकर पीडि़त झांसे में आ गया और 17 अप्रैल 2023 को सौदा तय हो गया। कुल सौदा 1,63,00,000 रुपये में तय हुआ। आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड और एक फर्जी पैन कार्ड नंबर का उपयोग करके आरोपियों ने एचडीएफसी बैंक विजयनगर शाखा और कोटक महिंद्रा बैंक रानीताल शाखा में खाते खुलवाए। दीपक को इस बात की भनक भी नहीं थी कि उनके सामने खड़ी महिला फर्जी है। इसके बाद बयाना 41,00,000 चेक के माध्यम से दिए गए। नकद भुगतान 10,00,000 और एक अन्य ट्रांजेक्शन में 19 लाख रुपये आरोपियों और फर्जी महिला को मौके पर दिए गए। अनुबंध होने के बाद जब नामांतरण और रजिस्ट्री की बात आई, तो आरोपी महीनों तक राजस्व विभाग की हड़ताल और सरकारी कछुआ चाल का बहाना बनाकर समय टालते रहे। झांसा देकर आरोपियों ने 27 नवंबर 2023 को समय-सीमा बढ़ाने का एक और नया अनुबंध भी करवा लिया।
विज्ञापन ने उड़ाई नींद
मामले में नया मोड़ तब आया जब 3 फरवरी 2024 को एक दैनिक समाचार पत्र में उसी जमीन को लेकर फूलमती के नाम से किसी तीसरे व्यक्ति के साथ सौदे का विज्ञापन छप गया। जब पीडि़त दीपक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, तो आरोपियों ने इसे अखबार की गलती (प्रिंटिंग मिस्टेक) बताकर पीडि़त को शांत कर दिया और कहा कि जमीन सिर्फ उन्हें ही मिलेगी।
फर्जीवाड़े से ऐसे उठा पर्दा
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आरोपियों द्वारा दिए गए कुछ चेक बाउंस हो गए और बैंक ट्रांजेक्शन में भारी विसंगतियां पाई गईं। पीडि़त को जमीन की रजिस्ट्री और मालिकाना हक को लेकर संदेह हुआ। लगातार मिल रहे धोखे और टालमटोल से परेशान होकर पीडि़त खुद पटवारी दफ्तर और जमीन के पते नव-निवेश कॉलोनी, गढ़ा पर जांच करने पहुंचे। वहां जो सच सामने आया, उसने पीडि़त के पैरों तले जमीन खिसका दी। जमीन की असली मालकिन फूलमती की मौत वर्षों पहले ही हो चुकी थी ।

फूलमती का इकलौता बेटा फूलचंद की भी मौत हो चुकी थी । उसका नाम भी सरकारी रिकॉर्ड से कट चुका था। आरोपियों ने जिस फर्जी फूलमती को खड़ा किया था, उसके नाम पर लिया गया 19,00,000 का चेक कभी बैंक में जमा ही नहीं किया गया, क्योंकि उस नाम का कोई वैध बैंक खाता या आईडी ही अस्तित्व में नहीं थी। जांच में पता चला कि जिस महिला फूलमती जोशी के नाम पर पैसे लिए गए, वह असल में कमला सेन है और असली भू-स्वामी का कोई अता-पता ही नहीं है। इसके बाद पीडि़त ने माढ़ोताल थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ प्रकरण
पुलिस ने लंबी जांच पड़ताल के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के बाद राकेश गुप्ता, लखन नायक और इनके साथ मिलकर फूलमती बनने का नाटक करने वाली कमला सेन के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने और आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

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