मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। 19 जून 2026 को हुई SEBI की बोर्ड बैठक में निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और निवेशकों की सुरक्षा मजबूत करने से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
बैठक में सबसे अहम निर्णय निवेशकों की मृत्यु के बाद उनके वारिसों को सिक्योरिटीज ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का रहा। SEBI ने छोटे मूल्य के दावों के लिए क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत कम दस्तावेजों के साथ तेजी से दावों का निपटारा किया जा सकेगा। साथ ही कई मामलों में दस्तावेजी प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।
SEBI ने स्टॉक एक्सचेंज के ओपन मार्केट के माध्यम से शेयर बायबैक की व्यवस्था को दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी। इससे कंपनियों को शेयर पुनर्खरीद के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा और बायबैक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकेगी।
म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए भी राहत भरा फैसला लिया गया है। अब म्यूचुअल फंड योजनाओं को दिन के दौरान नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए इंट्राडे उधार लेने की अनुमति होगी। हालांकि, यह राशि उसी कारोबारी दिन वापस करनी होगी और इसका इस्तेमाल अतिरिक्त जोखिम उठाने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
इसके अलावा, म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को बढ़ावा देने और आम निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से भी कई बदलावों को मंजूरी दी गई है। नए प्रावधानों से कुछ निवेशक वर्गों के लिए प्रक्रिया आसान होगी और बाजार में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
SEBI के इन फैसलों को भारतीय पूंजी बाजार को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशकों के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
