मनासा में बंपर गेहूं खरीदी: लक्ष्य से 10.5 हजार क्विंटल अधिक उपार्जन

मनासा। मनासा क्षेत्र में इस वर्ष रबी सीजन के तहत गेहूं उपार्जन का कार्य रिकॉर्ड सफलता के साथ संपन्न हो गया है। शासन द्वारा तय किए गए कड़े मापदंडों और लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए इस बार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक खरीदी दर्ज की गई है। क्षेत्र के कुल 3,793 किसानों ने उपार्जन केंद्रों पर अपनी उपज बेची, जिसके बाद अब केंद्रों से गेहूं का शत-प्रतिशत परिवहन भी पूरा कर लिया गया है।

लक्ष्य को पछाड़ा: 1.90 लाख क्विंटल से अधिक की खरीदी

प्रशासन द्वारा इस वर्ष मनासा क्षेत्र के लिए 1,80,000 क्विंटल गेहूं खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अनुकूल मौसम और बंपर पैदावार के चलते केंद्रों पर लक्ष्य से कहीं अधिक आवक हुई। नतीजतन, लक्ष्य के विरुद्ध कुल 1,90,507.561 क्विंटल गेहूं खरीदा गया, जो तय लक्ष्य से लगभग 10,507 क्विंटल अधिक है।

पचास करोड़ से अधिक का डिजिटल भुगतान, 1 खाता होल्ड पर

किसानों को उपज बेचते ही त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए इस बार क्कष्टस््रक्क पोर्टल के माध्यम से व्यवस्थाओं की कड़ाई से मॉनिटरिंग की गई। क्षेत्र के 3,792 किसानों के बैंक खातों में लगभग पचास करोड़ की राशि सीधे ट्रांसफर कर दी गई है।

तकनीकी अड़चन के कारण केवल 1 किसान का भुगतान रुका हुआ है। फिनो बैंक खाते से संबंधित टेक्निकल समस्या की वजह से इस किसान के 35,436 पेंडिंग हैं, जिसे जल्द क्लियर करने का दावा किया जा रहा है।

जिला स्तर पर चमका कंजार्डा केंद्र

क्षेत्र के सभी केंद्रों पर इस बार बेहतर उपार्जन देखने को मिला, लेकिन इसमें कंजार्डा उपार्जन केंद्र ने बाजी मार ली। कंजार्डा केंद्र पर अकेले सबसे ज्यादा 26,380.5 क्विंटल गेहूं की खरीदी हुई। इस बेहतरीन रिकॉर्ड के कारण कंजार्डा केंद्र को जिले में तृतीय रैंक प्राप्त हुई है।

100′ परिवहन पूरा, इन वेयरहाउसों में हुआ भंडारण

खरीदी बंद होने के साथ ही प्रशासन ने परिवहन की रफ्तार तेज रखी, जिससे केंद्रों पर अनाज का एक भी दाना शेष नहीं बचा है। बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता के बीच खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित भंडारण के लिए इन मुख्य वेयरहाउसों में भेजा गया है:

शासकीय वेयरहाउस मनासा, हरहरी वेयरहाउस, मार्केटिंग वेयरहाउस जलीनेर, कृषि उपज मंडी वेयरहाउस मनासा, गोपाल बसंत वेयरहाउस, जय जिनेन्द्र वेयरहाउस जन्नोद एवं आदिनाथ वेयरहाउस (अल्हड़ रोड, मनासा)।

’हम्मालों की कमी’ और ‘सर्वर’ रहे मुख्य चुनौती

सफल उपार्जन के बीच इस बार किसानों और प्रबंधकों को कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा:

नॉन-एफएक्यू (हृशठ्ठ-स्न्रक्त) गेहूं रिजेक्ट: गुणवत्ता मानकों (स्न्रक्त) पर खरा न उतरने के कारण अनुमानत: 30 से 50 किसानों का गेहूं रिजेक्ट हुआ। हालांकि, ओवरऑल रिकॉर्ड में रिजेक्शन की मात्रा निरंक रही।

हम्मालों और सर्वर की किल्लत: बिलिंग के समय सर्वर डाउन होने की समस्या आई। वहीं, केंद्रों पर हम्मालों (पल्लेदारों) की कमी सबसे बड़ी चुनौती रही, जिसकी शिकायतें किसानों ने भी कीं। हालांकि, प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए हम्मालों से संपर्क साधा, उनकी संख्या बढ़ाई और समय रहते व्यवस्था को संभाला।

मुख्य आंकड़े एक नजर में –

कुल पंजीकृत एवं विक्रय करने वाले किसान : 3,793

कुल गेहूं खरीदी : 1,90,507.561 क्विंटल

शासन का लक्ष्य : 1,80,000 क्विंटल

लक्ष्य से अधिक खरीदी : 10,507 क्विंटल

कुल भुगतान : 50.00 करोड़ से अधिक

लंबित भुगतान : 1 किसान, 35,436

सर्वाधिक खरीदी वाला केंद्र : कंजार्डा (26,380.50 क्विंटल)

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