
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को भाजपा सरकार पर आदिवासी अधिकारों के व्यवस्थित हनन का आरोप लगाते हुए राज्य में आदिवासियों की जमीन, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में जीतू पटवारी ने भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के प्रदेश दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि आदिवासियों को “वनवासी” कहे जाने पर राष्ट्रपति द्वारा जताई गई आपत्ति उनकी संवेदनशीलता और संवैधानिक समझ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और उनकी अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं तथा संवैधानिक अधिकार हैं।
पटवारी ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.53 करोड़ आदिवासी निवास करते हैं, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक नुकसान इसी वर्ग को हुआ है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को लिखे पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि कानूनी संरक्षण के बावजूद हाल के वर्षों में 1.26 लाख हेक्टेयर से अधिक आदिवासी भूमि का हस्तांतरण हुआ है। उनका आरोप था कि प्रभावशाली लोगों, उद्योग समूहों और भाजपा से जुड़े तत्वों ने सरकारी संरक्षण में आदिवासी जमीनों पर कब्जा किया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 2028 में कांग्रेस की सरकार बनने पर ऐसे सभी भूमि सौदों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और अवैध रूप से हस्तांतरित भूमि आदिवासी मालिकों को वापस दिलाई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 1.5 लाख हेक्टेयर आदिवासी भूमि खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दी गई, जिससे हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं।
पटवारी ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की 1.53 लाख बैकलॉग रिक्तियों के लंबित रहने, आदिवासी कल्याण योजनाओं में भ्रष्टाचार तथा आदिवासी महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि हाल के वर्षों में लगभग 1.75 लाख आदिवासी महिलाएं और बालिकाएं लापता हुई हैं या मानव तस्करी का शिकार बनी हैं।
मुख्यमंत्री पर विपक्षी नेताओं के प्रति अमर्यादित भाषा के प्रयोग का आरोप लगाते हुए पटवारी ने कथित तबादला उद्योग और हालिया पटवारी तबादला प्रकरण को प्रशासनिक अव्यवस्था का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर भूमि हस्तांतरण, विस्थापन, वनाधिकार उल्लंघन, बैकलॉग भर्ती, महिला सुरक्षा और तबादलों में कथित अनियमितताओं की जांच कराएगी। उनके अनुसार यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई है।
