फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आज की दुनिया में होर्मुज जलडमरूमध्य केवल पश्चिम एशिया का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता का आधार बन चुका है. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा होर्मुज के खुले रहने को ‘विश्व की आवश्यकता’ बताना और ट्रंप का भारत की सुरक्षा के प्रति समर्थन जताना बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का महत्वपूर्ण संकेत है.
होर्मुज जल डमरू मध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है. यदि किसी कारण से यह मार्ग बाधित होता है तो इसका प्रभाव केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एशिया, यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा. भारत, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, उसके लिए होर्मुज की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है.
पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया लगातार अस्थिरता का केंद्र बना रहा है. ईरान और इजरायल के बीच तनाव, यमन में हूती विद्रोहियों की गतिविधियां तथा समुद्री जहाजों पर हमलों ने वैश्विक व्यापार के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा की हैं. ऐसे समय में भारत का यह स्पष्ट रुख कि समुद्री मार्ग खुले और सुरक्षित बने रहें, केवल राष्ट्रीय हित का नहीं बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी का परिचायक है.
प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की बातचीत का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों से जुड़ा है. ट्रंप का यह कथन कि भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका उसके साथ खड़ा मिलेगा, भले ही राजनीतिक संदर्भों में देखा जाए, लेकिन यह भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और सामरिक महत्व को रेखांकित करता है. पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, खुफिया सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी लगातार मजबूत हुई है. आज दोनों देश केवल साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले प्रमुख खिलाड़ी बन चुके हैं.
हालांकि भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी रणनीतिक स्वायत्तता रही है. भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए हैं. यही कारण है कि भारत अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ खाड़ी देशों, रूस और यूरोपीय देशों के साथ भी अपने संबंधों को मजबूती देता रहा है.
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. दुनिया ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो संवाद, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दे. प्रधानमंत्री मोदी का होर्मुज के संदर्भ में दिया गया संदेश इसी व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है. यह केवल तेल और व्यापार का प्रश्न नहीं, बल्कि वैश्विक शांति, आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और आर्थिक विकास से जुड़ा विषय है.
स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और रणनीतिक साझेदारियां विश्व राजनीति के केंद्र में रहेंगी. भारत इस विमर्श में अब दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने वाले देशों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा दिखाई दे रहा है. होर्मुज को खुला रखना इसलिए केवल क्षेत्रीय आवश्यकता नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है.
