
बैतूल। आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्ति से परिचित कराती है और सकारात्मक सोच को उच्च जीवन मूल्यों से जोड़ती है वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों से जूझ रहा है तब आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्य का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को बैतूल में ब्रह्म कुमारी संस्थान द्वारा आयोजित आध्यात्मिक जागृति से जनजाति समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन में यह विचार व्यक्त किया उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव होगी जब समाज का कोई भी वर्ग विकास की मुख्य धारा से पीछे ना रहे।
