
इंदौर. नगर निगम के तीन पार्षदों पर चल रहे दलबदल प्रकरण में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य शासन को अंतिम रूप से एक माह का समय दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि तय समय में निर्णय नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी से व्यक्तिगत तौर पर लागत वसूली जाएगी.
मामला वार्ड 45 की पार्षद सोनिला मिमरोट की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है. याचिका में पार्षद ममता सुभाष सुनेर, शिवम यादव और विनीता धर्मेंद्र मौर्य की सदस्यता को चुनौती दी गई है. आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद तीनों ने अपनी मूल पार्टी छोड़कर दूसरे दल का समर्थन किया, जो दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की श्रेणी में आता है. याचिकाकर्ता ने 20 मई 2024 को मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 17(3) के तहत राज्य शासन के समक्ष आवेदन दिया था, लेकिन एक साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी कोई निर्णय नहीं हुआ, इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. इस पर जस्टिस प्रणय वर्मा ने 26 अगस्त 2025 को राज्य शासन को सभी पक्षों को सुनकर दो माह में फैसला करने का निर्देश दिया था, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ. इसके चलते अवमानना याचिका दायर की गई. अवमानना पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने अब एक माह की अंतिम मोहलत देते हुए सख्त चेतावनी दी है. कोर्ट ने कहा कि यदि इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ और याचिकाकर्ता को फिर से कोर्ट आना पड़ा, तो वर्तमान और भविष्य की याचिकाओं की लागत संबंधित अधिकारी से व्यक्तिगत रूप से वसूली जाएगी.
