न्यूयार्क, 17 जून (वार्ता) अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के मसौदे को जल्द से जल्द जारी करने की कोशिशें तेज की जा रही हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक दस्तावेज में दोनों देशों के बीच तुरंत सैन्य हमले रोकने, एक-दूसरे की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करने और अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम शांति समझौते तक पहुंचने का पूरा खाका तैयार किया गया है। यह समझौता केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध हटाने, समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और ईरान की अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत करने जैसी बड़ी शर्तें भी जोड़ी गयी हैं। इसके अलावा, परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण, ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त करने और पूरी प्रक्रिया की अंतरराष्ट्रीय निगरानी जैसे महत्वपूर्ण बिंदु भी इसमें शामिल हैं। इस समझौते को पूरी तरह कानूनी रूप देने के लिए अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक विशेष प्रस्ताव भी लाया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत कई प्रमुख शर्त और नियम तय किए गए हैं। इस पर हस्ताक्षर होते ही ईरान और अमेरिका, साथ ही इस युद्ध में शामिल उनके सभी सहयोगी देश हर मोर्चे (लेबनान सहित) पर लड़ाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोक देंगे। दोनों पक्ष भविष्य में एक-दूसरे पर कोई हमला नहीं करने के लिए भी प्रतिबद्ध होंगे।
इसके साथ ही, दोनों देश एक-दूसरे की आजादी, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान करेंगे। दोनों में से कोई भी देश एक-दूसरे के घरेलू और आंतरिक मामलों में किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं करेगा। दोनों देशों ने यह भी तय किया है कि वे इस समझौते के बाद अगले 60 दिनों के भीतर हर हाल में एक अंतिम और स्थाई शांति समझौते पर पहुंच जाएंगे। अगर दोनों पक्ष चाहें तो आपसी सहमति से इस समय-सीमा को आगे भी बढ़ा सकते हैं। जैसे ही इस समझौते पर दस्तखत होंगे, अमेरिका तुरंत ईरान की समुद्री नाकेबंदी को खत्म कर देगा। अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि समुद्र में ईरान के जहाजों के रास्ते में कोई रुकावट न आए। अगले 30 दिनों के भीतर समुद्री व्यापार और जहाजों का आना-जाना पूरी क्षमता के साथ उसी स्तर पर बहाल कर दिया जाएगा, जैसा कि युद्ध शुरू होने से पहले था।इसके बदले में अमेरिका ने यह भी वादा किया है कि अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर वह ईरान के आसपास के इलाकों से अपनी सेनाओं को पूरी तरह से हटा लेगा। दूसरी तरफ, ईरान भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए तुरंत ऐसे कदम उठाएगा जिससे अरब की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक व्यापारिक जहाजों का आना-जाना अगले 30 दिनों में पहले की तरह सामान्य हो जाए। इस दौरान समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने और तकनीकी दिक्कतों को दूर करने का काम भी ईरान खुद करेगा।
ईरान की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक बड़ी योजना तैयार करेगा। इसके तहत ईरान के विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का धन सुनिश्चित किया जाएगा। इस आर्थिक मदद को जमीन पर उतारने का पूरा तरीका अंतिम समझौते के 60 दिनों के भीतर तय कर लिया जाएगा। इसके अलावा, अमेरिका एक निश्चित समय-सारिणी के तहत ईरान पर लगे हर तरह के प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के साथ-साथ अमेरिका के अपने सभी एकतरफा प्रतिबंध भी शामिल हैं। परमाणु मुद्दे को लेकर दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री का आगे क्या करना है और उसकी भविष्य की परमाणु जरूरतों को कैसे पूरा किया जाए, इन सभी बातों का अंतिम फैसला मुख्य शांति समझौते में विस्तार से किया जाएगा। जब तक अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों देश यथास्थिति बनाए रखेंगे। इसका मतलब यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को जहां है वहीं रोके रखेगा और अमेरिका भी इस दौरान ईरान पर न तो कोई नया प्रतिबंध लगाएगा और न ही खाड़ी क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाएगा।
इस समझौते पर दस्तखत होने के तुरंत बाद, जब तक सारे प्रतिबंध पूरी तरह हट नहीं जाते, तब तक के लिए अमेरिकी वित्त विभाग ईरान को बड़ी राहत देगा। अमेरिका एक विशेष छूट जारी करेगा, जिसके तहत ईरान अपने कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे बनी चीजों का निर्यात आसानी से कर सकेगा। इसके साथ ही, इससे जुड़ी बैंक, बीमा और परिवहन जैसी जरूरी सेवाओं पर भी कोई रोक नहीं होगी। जैसे-जैसे अंतिम समझौते की बातचीत आगे बढ़ेगी, अमेरिका दुनिया भर के बैंकों में जब्त पड़ी ईरान की तमाम संपत्तियों और पैसों को धीरे-धीरे मुक्त करता जाएगा, ताकि ईरान उनका पूरा इस्तेमाल कर सके। ईरान की यह सारी धनराशि ईरान के केंद्रीय बैंक की देखरेख में आएगी। ईरान इस पैसे का इस्तेमाल अपनी मर्जी से किसी भी भुगतान या काम के लिए करने के लिए पूरी तरह आजाद होगा और अमेरिका इसके लिए जरूरी सभी कानूनी परमिट और लाइसेंस तुरंत जारी करेगा।भविष्य में इस समझौते का पालन ठीक से हो रहा है या नहीं, यह देखने के लिए दोनों देश मिलकर एक खास निगरानी तंत्र बनाएंगे, जो इस पूरे शांति मिशन पर नजर रखेगा। इस शुरुआती समझौते पर दस्तखत होने के बाद और जहाजों की आवाजाही, सेना की वापसी और तेल निर्यात में छूट जैसे शुरुआती नियमों पर भरोसा कायम होने के बाद, दोनों देश केवल बचे हुए मुद्दों पर अंतिम बातचीत शुरू करेंगे। इस पूरी बातचीत के बाद जो अंतिम और मुख्य शांति समझौता तैयार होगा, उसे पूरी दुनिया में कानूनी रूप से लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक अनिवार्य प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जायेगी।

