ईरान जब चाहे तब होर्मुज जलडमरूमध्य कर सकता है बंद: अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट

वॉशिंगटन, 17 जून (वार्ता) अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को बाधित करने या उसे पूरी तरह से बंद करने की क्षमता बहुत बढ़ गई है जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बहुत अहम एवं संवेदनशील मार्ग है। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार हाल के सैन्य तनाव एवं समुद्री क्षेत्र में आई कई रुकावटों के बाद इस घटनाक्रम ने तेहरान की रणनीतिक शक्ति के बारे में अमेरिका के दृष्टिकोण को बदल दिया है। खुफिया अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने साबित कर दिया है कि वह जब चाहे तब जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात में बाधा डालने का इरादा रख सकता है और इसकी क्षमता उसके पास हैं। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि भविष्य में वह ऐसा कदम फिर से उठा सकता है।
सीएनएन ने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के आकलन की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से कहा, “हमने अब ईरान को उस जलडमरूमध्य का वास्तविक नियंत्रण सौंप दिया है जो किसी भी परमाणु हथियार से ज़्यादा ताकतवर है।” उन्होंने कहा कि युद्ध ने ईरान द्वारा भविष्य में इसी तरह की रणनीतियों का उपयोग करने के तरीके के बारे में सोच को मूल रूप से बदल दिया है।

गौरतलब है कि व्यापक बातचीत के बाद इस मार्ग को बहाल करने के लिए एक बुनियादी सहमति बनी है लेकिन जानकारों का मानना है कि ईरान पहले ही यह दिखा चुका है कि जब उसे रणनीतिक रूप से फ़ायदेमंद लगता है वह वाणिज्यिक नौवहन एवं ऊर्जा निर्यात के प्रवाह को रोक सकता है।आकलन में शामिल कुछ स्रोतों का तर्क है कि यह प्रभावी रूप से ईरान को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक पर एक तरह का दबाव वाला नियंत्रण प्रदान करता है जिससे इसका भू-राजनीतिक प्रभाव काफी बढ़ जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डालने की क्षमता को अब ईरान की असंयमित रणनीति का एक मुख्य आधार माना जाता है। इसके साथ ही, इसमें क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाने और विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए तेज़ हमला करने वाली नौसैनिक जहाजों, मिसाइलों, ड्रोन और माइन बिछाने की तकनीकों का इस्तेमाल करने की क्षमता भी शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने माना है कि जलमार्ग को फिर से खोलने और सुरक्षित करने पर बातचीत यह दिखाती है कि ईरान के पास कितनी सौदेबाजी करने की शक्ति है। हालांकि, खुफिया समुदाय में इस बात पर कोई सहमति नहीं है कि ईरान भविष्य में इस क्षमता का कितनी बार और कितना निर्णायक रूप से इस्तेमाल करेगा जबकि कुछ विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि इसकी सफलता ईरान को भविष्य में कदम उठाने के लिए उत्साहित कर सकती है। ईरान का मानना है कि वह इस जलडमरूमध्य का उपयोग हथियार के रूप में करना जारी रख सकता है। इसका एक मुख्य कारण यह है कि उसके पास अभी भी हथियारों का बड़ा भंडार मौजूद है, जिसमें मिसाइलें, ड्रोन, मिसाइल लॉन्चर और सैकड़ों छोटी, तेज़ रफ़्तार वाली नावें शामिल हैं। ये नावें इस जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों को परेशान करती रहती हैं और इनका इस्तेमाल माइंस बिछाने के लिए भी किया जा सकता है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अपने सैन्य औद्योगिक आधार को भी अमेरिका के अनुमान से कहीं ज़्यादा तेज़ी से पुनः तैयार कर रहा है और उसने नया ड्रोन का उत्पादन भी शुरू कर दिया है।

मामले को और भी मुश्किल बनाने वाली बात यह है कि ईरान में क्षेत्र की दूसरी शक्तियों को प्रभावित करने की क्षमता है। इनमें ऐसे ग्रुप भी शामिल हैं जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले एक और अहम समुद्री रास्ते में रुकावट डाल सकते हैं। इससे दुनिया के कई नौवहन मार्ग पर एक साथ दबाव पड़ने की आशंका उत्पन्न होती है। अधिकारियों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर इसके गंभीर नतीजे होंगे। अमेरिकी योजनाकार उन पुरानी धारणाओं पर भी फिर से विचार कर रहे हैं जिनके अनुसार ईरान को आर्थिक जवाबी कार्रवाई या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने के डर से रोका जा सकता था। इसके बजाय हाल के आकलन बताते हैं कि ईरान ने यह अनुमान लगाया था कि जलडमरूमध्य में कुछ समय के लिए रुकावट उत्पन्न करने से उसे रणनीतिक बढ़त मिलेगी खासकर इसलिए क्योंकि उसके पास नौसेना और मिसाइल से जुड़े काफी संसाधन मौजूद हैं। इसके परिणामस्वरुप, अमेरिका अब एक और जटिल रणनीतिक माहौल का सामना कर रहा है जिसमें समुद्री भौगोलिक स्थिति को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की ईरान की क्षमता को क्षेत्रीय सुरक्षा की एक स्थायी विशेषता माना जा रहा है, न कि युद्धकाल के दौरान हुए किसी अस्थायी विकास के रूप में।

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