नयी दिल्ली, 16 जून (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश के जिन राज्यों में अल-नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है, वहां के चिह्नित जिलों के जिला अधिकारियों, कृषि विभाग, केवीके और अन्य विस्तार तंत्र के साथ समन्वित बैठकें आयोजित की जायें।
उन्होंने कहा कि इन बैठकों में जिला स्तर पर पूरी स्थिति स्पष्ट कर किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाये, ताकि हर किसान को यह पता रहे कि उसके क्षेत्र के लिए कौन-सी सावधानियां और कौन-से फसल विकल्प अधिक सुरक्षित हैं।
वह यहां उच्च स्तरीय साप्ताहिक कृषि समीक्षा बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बैठक में खरीफ 2026 के लिए देशभर की तैयारियों की समीक्षा के साथ ही, संभावित अल-नीनो परिस्थितियों पर गहन चर्चा की। उन्होंने कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता और कम बारिश वाले जिलों के लिए अग्रिम आकस्मिक योजना पर विशेष जोर देते हुए साफ संदेश दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसान हितों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में अल-नीनो की संभावित स्थिति पर चर्चा करते हुए श्री चौहान ने साफ निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम बारिश या वर्षा में असमानता की आशंका है, वहां पहले से पूरी तैयारी की जाये। उन्होंने कहा कि ऐसे जिलों की स्पष्ट पहचान कर राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसलवार आकस्मिक योजना तैयार किये जायें, ताकि किसी भी मौसमीय चुनौती की स्थिति में किसानों को तुरंत विकल्प, सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि पानी के संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतराफसली और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष ध्यान देते हुए, हर जोखिम वाले जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जाये।
श्री चौहान ने यह भी कहा कि खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के बजाय, वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर शांत, भरोसेमंद और समाधान-उन्मुख संदेश किसानों तक पहुंचे, यही सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में खरीफ 2026 के लिए फसलवार लक्ष्य, बुवाई की प्रगति और राज्यवार तैयारियों की समीक्षा करते हुए कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। श्री चौहान ने वैज्ञानिक तरीकों, सही किस्मों के चयन, अंतराफसली खेती, मल्चिंग और नमी संरक्षण जैसे उपायों को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने पर जोर दिया, ताकि कपास की उत्पादकता और आय दोनों में सुधार हो।
बैठक में दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। श्री सिंह ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि अरहर, उड़द, मूंग जैसी दालों में देश अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बने और आयात पर निर्भरता कम हो। इसके लिए राज्यों के साथ मिलकर फसल चक्र, क्षेत्र विस्तार, बेहतर बीज उपलब्धता और तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसान सुरक्षित आय के साथ दलहन उत्पादन बढ़ा सकें।
समीक्षा के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, बाजार में मंडी भाव, जलाशयों और जल भंडारण की स्थिति और राज्यवार स्टॉक की जानकारी भी प्रस्तुत की गयी।
कृषि मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक उपलब्धता है और जैसे-जैसे मानसून की रफ्तार बढ़ेगी, राज्यों और जिलों तक आपूर्ति को और चुस्त-दुरुस्त रखा जाएगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देने के साथ ही इस पर भी जोर दिया कि जहां कहीं भी सूक्ष्म स्तर पर कमी की आशंका दिखे, वहां अग्रिम रूप से आपूर्ति सुनिश्चित की जाये, ताकि किसान को किसी तरह की दिक्कत न हो।
