तेल अवीव, 14 जून (वार्ता) अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित समझौते की शर्तों को लेकर इजरायल ने असंतोष जताया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायली नेतृत्व को लगता है कि प्रस्तावित समझौता उसके रणनीतिक हितों के अनुकूल नहीं है। वाईनेट समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) इजरायल के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। nयह रिपोर्ट ऐसे समय आयी है जब समझौते के समय को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो जाएंगे, जबकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि समझौते पर हस्ताक्षर अगले कुछ दिनों में हो सकते हैं। मध्यस्थता में शामिल पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर किये जाने की संभावना है, जिसके बाद अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता आगे बढ़ाने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभायी है।श्री ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के अंतिम बिंदुओं पर सभी पक्षों की सहमति बन चुकी है, जिनमें इजरायल भी शामिल है। उन्होंने शनिवार को भी दोहराया कि समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
वाईनेट से बातचीत में एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने कहा, “इस घोषित समझौता ज्ञापन से कोई खुश नहीं है। हमें लगता है कि यह हमारे लिए अच्छा नहीं है और इजरायल के हितों को नुकसान पहुंचाता है।” अधिकारी ने यह भी दावा किया कि वार्ता प्रक्रिया में इजरायल की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और समझौते के अंतिम स्वरूप पर उसका प्रभाव सीमित रहा। अमेरिका जहां इस समझौते को मुख्य रूप से ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने की दिशा में एक कदम बता रहा है, वहीं इजरायली अधिकारियों का कहना है कि खतरा केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार इजरायल की चिंताओं में ईरान का सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइलों का विकास, लेबनान और यमन में उसके सहयोगी समूहों को समर्थन तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य दीर्घकालिक मुद्दे शामिल हैं। इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि ईरान को केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने या वार्ता में शामिल होने के बदले कोई धनराशि नहीं दी जाएगी। श्री वेंस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “ईरान को कोई नकद राशि नहीं दी जा रही है और केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने या बैठक में शामिल होने के कारण कोई फंड जारी नहीं किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि किसी भी वित्तीय राहत पर फैसला तभी होगा जब ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। परमाणु कार्यक्रम अब भी वार्ता का सबसे बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है। ईरान लंबे समय से यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की मांग का विरोध करता रहा है, जबकि दोनों पक्ष संभावित समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखे हुए हैं।

