कतर प्रतिनिधिमंडल शांति समझौते पर वार्ता के लिए तेहरान पहुंचा:सूत्र

वाशिंगटन, 14 जून (वार्ता) अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे शांति वार्ता प्रयासों के बीच कतर का प्रतिनिधिमंडल रविवार को तेहरान पहुंच गया है, जहाँ समझौते के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान के साथ एक नए शांति समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर करने की योजना की पुष्टि की है। उन्होंने इसे अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी और संभावित सफलता बताया है। श्री ट्रंप ने कहा कि इस समझौते पर रविवार को ‘हस्ताक्षर होना तय’ है। साथ ही उन्होंने कहा, “जब सब कुछ शांत हो जाएगा, तब हम आगे बढ़ेंगे और परमाणु धूल (न्यूक्लियर डस्ट) को शक्तिशाली ग्रेनाइट पहाड़ों के नीचे गहराई में दफन कर देंगे।” ईरान पिछले कई दशकों से अपने परमाणु कार्यक्रम को विकसित कर रहा है, लेकिन वह लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका यह कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण ऊर्जा उद्देश्यों के लिए है। ईरान ने अपनी बढ़ती घरेलू ऊर्जा मांग को पूरा करने और तेल की खपत को कम करने के लिए अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने की योजना भी तैयार की है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में ईंधन के रूप में यूरेनियम का इस्तेमाल होता है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (आईएईए) के अनुसार, ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन की ऐसी क्षमताएं हैं जो गैर-परमाणु-हथियार वाले देशों में आमतौर पर नहीं देखी जाती हैं। इसी वजह से उसके इस कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर में चिंता जताई जाती रही है।

राजनयिक मोर्चे पर हो रही इस हलचल के बीच, मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि समझौते को अंतिम रूप देने में मदद के लिए कतर के वार्ताकार अमेरिकी अधिकारियों के तालमेल के साथ रविवार सुबह तेहरान पहुंचे। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, कतर के इस प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी अधिकारियों के साथ गंभीर विचार-विमर्श किया है। हालांकि, ताजा दौर की इस बातचीत के बीच समझौते की शर्तों और समय को लेकर अमेरिका और ईरान के बयानों में अंतर दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका ने संकेत दिया है कि इस सहमति पत्र पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ ने इस समयसीमा को खारिज कर दिया है और श्री ट्रंप के इस ऐलान का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, इस हफ्ते की शुरुआत में भी ईरानी और कतर के अधिकारियों ने तेहरान में मुलाकात की थी। वहां ईरान ने मध्यस्थों के जरिए इस समझौते के लिए अपना एक प्रारंभिक प्रस्ताव पेश किया था। दोनों पक्षों की ओर से जारी ये बातचीत दिखाती है कि मतभेदों को कम करने और समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, हालांकि इसके सटीक समय और दायरे को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। श्री ट्रंप ने शनिवार दोपहर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “इस समझौते पर कल हस्ताक्षर होना तय है। ईरान के साथ हमारे संबंध पिछली सरकारों की तुलना में बहुत अलग और काफी बेहतर हैं।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बातचीत के नतीजों को लेकर सावधानी भरी उम्मीद जताते हुए कहा, “उम्मीद है कि यह पूरी प्रक्रिया जल्दी, आसानी से और सुचारू रूप से पूरी हो जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमारे पास आखिरी विकल्प मौजूद है और उम्मीद है कि उसका दोबारा कभी इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा।”
श्री ट्रंप ने कहा कि समझौता होते ही होर्मुज जलडमरू मध्य को ‘तुरंत’ खोल दिया जाएगा। वैश्विक तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला यह समुद्री रास्ता इस टकराव के दौरान प्रभावित रहा है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने घोषणा की कि अगले 24 घंटों के भीतर समझौता संपन्न हो सकता है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले कहा था कि उनका देश इस ‘ऐतिहासिक’ हस्ताक्षर समारोह के लिए तैयारियां कर रहा है। श्री शरीफ ने यह भी बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अगले सप्ताह से ‘तकनीकी स्तर की बातचीत’ शुरू होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए एक मजबूत नींव रखेगा। फिर भी, इस समझौते के समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने अधिक सतर्क रुख अपनाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हस्ताक्षर ‘कल नहीं होंगे’, हालांकि उन्होंने आने वाले दिनों में ऐसा होने की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि ‘दूसरे पक्ष की अस्थिरता’ के कारण ईरान को किसी भी घोषणा को लेकर पूरी तरह सतर्क रहना होगा। श्री ट्रंप ने वर्ष 2015 के ईरान परमाणु समझौते की भी आलोचना की और उसे अप्रभावी तथा खतरनाक बताया। उन्होंने दावा किया कि उनका प्रस्तावित समझौता इसके ‘ठीक विपरीत’ होगा।

इस नए मसौदे में व्यापारिक मार्गों को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शामिल है, जो लंबे समय से गतिरोध का विषय रहा है। ईरान का कहना है कि उसकी परमाणु गतिविधियां शांतिपूर्ण ऊर्जा के लिए हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थाएं यूरेनियम संवर्धन के स्तर पर बार-बार चिंता जताती रही हैं। भले ही कुछ मध्यस्थों की तरफ से उम्मीदें जताई जा रही हैं, लेकिन ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ के अधिकारियों ने तुरंत हस्ताक्षर होने के दावों को खारिज कर दिया है, जिससे इस प्रक्रिया में सस्पेंस और बढ़ गया है। पिछले कुछ हफ्तों में प्रगति की खबरें तो आई हैं, लेकिन किसी भी अंतिम फैसले पर पहुंचने से पहले दोनों पक्ष इस प्रस्ताव के राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं।

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