जबलपुर: न्याय तक समावेशी पहुंच को प्रोत्साहित करने तथा श्रवण एवं वाक्-बाधित समुदाय के मध्य विधिक जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में अनुगूंज शीर्षक से एक दिवसीय प्रदेशव्यापी विधिक साक्षरता एवं आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन राज्य प्राधिकरण के सभागार में किया गया।
उल्लेखनीय है कि अनुगूंज देश के किसी भी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा श्रवण एवं वाक्-बाधित समुदाय के लिए विशेष रूप से आयोजित अपनी प्रकृति का प्रथम प्रदेशव्यापी कार्यक्रम है। यह पहल समाज के प्रत्येक वर्ग तक बिना किसी भेदभाव अथवा बाधा के विधिक सेवाओं का लाभ पहुंचाने हेतु म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की दृढ़ प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है। यह कार्यक्रम प्रदेश की समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से एक साथ आयोजित किया गया, जिससे राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रवण एवं वाक्-बाधित समुदाय के सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित हुई।
कमजोर एवं वंचित वर्गों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझे कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ गरिमामय एवं मंगलमय वातावरण में हुआ। दीप प्रज्ज्वलन की यह परंपरा दिव्यांगजन, विशेषकर श्रवण एवं वाक्-बाधित व्यक्तियों के लिए समानता, सुगम्यता, सशक्तिकरण एवं समावेशी न्याय सुनिश्चित करने के सामूहिक संकल्प का प्रतीक रही।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने कहा कि वास्तव में समावेशी न्याय व्यवस्था वही है, जो समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझे तथा उनके अनुरूप संवेदनशीलता के साथ कार्य करे।
उन्होंने श्रवण एवं वाक्-बाधित समुदाय के सशक्तिकरण हेतु विधिक जागरूकता, सुगम्यता तथा तकनीकी नवाचार के महत्व पर विशेष बल दिया न्यायमूर्ति श्री रूसिया ने सभी संबंधित हितधारकों से आह्वान किया कि वे सामूहिक रूप से ऐसे वातावरण के निर्माण हेतु कार्य करें, जिसमें दिव्यांगजन, विशेषकर श्रवण एवं वाक्-बाधित व्यक्ति, गरिमा, आत्मनिर्भरता एवं समान अवसरों के साथ अपने संवैधानिक तथा वैधानिक अधिकारों का पूर्ण रूप से उपभोग कर सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा, न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि न्याय तक समान पहुंच संविधान द्वारा प्रदत्त एक महत्वपूर्ण आश्वासन है, जिसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग को बिना किसी भेदभाव के प्राप्त होना चाहिए। उन्होंने दिव्यांगजनों, विशेषकर श्रवण एवं वाक्-बाधित व्यक्तियों के लिए विधिक उपचारों तक पहुंच में बाधक संचारगत एवं प्रक्रियात्मक अवरोधों को दूर किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
