नयी दिल्ली 12 जून (वार्ता) एक वर्ष पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के संचालन महानिदेशक रहे और अभी सेना के डिप्टी चीफ (रणनीति) के रूप में कार्यरत ले. जनरल राजीव घई को एक बेहद अहम जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। ले. जनरल घई को प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल राजा सब्रमणि की जगह यह जिम्मेदारी दी गयी है। जनरल सुब्रमणि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष बनने से पहले सैन्य सलाहकार के पद पर थे। ले. जनरल घई ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिका निभाई थी और वह अपने बयानों के लिए खासे चर्चित भी हुए थे।
सैन्य सलाहकार के पद पर नियुक्त किये जाने वाले ले.जनरल घई पहले सेवारत अधिकारी हैं। अभी तक इस पद पर केवल सेवानिवृत अधिकारियों को ही नियुकत किया जाता रहा है। सैन्य सलाहकार का पद 2018 में सर्जित किया गया था और इससे पहले सेवानिवृत जनरल खंडारे , जनरल अनिल चौहान , जनरल राजा सुब्रमणि और एयर मार्शल संदीप सिंह इस पद पर कार्य कर चुके हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का कार्यकारी और प्रशासनिक अंग है। यह प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली इस परिषद को राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के सभी आंतरिक, बाह्य और साइबर मामलों पर सलाह देने का काम करता है। यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत कार्य करता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार इस सचिवालय के सचिव के रूप में कार्य करते हैं और प्रमुख रणनीतिक योजनाकार होते हैं।
ले.जनरल घई सेना के संचालन में महानिदेशक रहने से पहले पंद्रहवीं कोर के प्रमुख भी रह चुके हैं। उन्हें 16 दिसंबर 1989 को भारतीय सैन्य अकादमी से कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन मिला था। तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में, उन्होंने कई कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी पदों पर कार्य किया है। उन्हें पारंपरिक और आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव है और उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स में कंपनी कमांडर के रूप में और पूर्वोत्तर में उग्रवाद के दौरान सेवाएं दी हैं।

