नयी दिल्ली, 15 मई (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चैरिटेबल संस्था, ‘द स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया’ (एसआरएमएफ) की अचल संपत्तियों की धोखाधड़ी से बिक्री और अवैध रूप से हड़पने के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
ईडी ने आज यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धनशोधन मामले के सिलसिले में दो मुख्य आरोपियों जी. राम चंद्र मोहन और आकाश मालवीय को गिरफ़्तार किया है। यह मामला एक चैरिटेबल संस्था एसआरएमएफ की अचल संपत्तियों की धोखाधड़ी से बिक्री और अवैध रूप से हस्तांतरण से जुड़ा है।
नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
ये गिरफ़्तारियाँ 14-15 मई को चलाए गए व्यापक तलाशी अभियानों के बाद की गईं। ईडी ने ‘सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ और उसके निदेशकों के बैंक खातों और चल संपत्तियों को ज़ब्त करने के आदेश भी जारी किए हैं। इन पर इस धोखाधड़ी में कथित रूप से शामिल होने का आरोप है।
ईडी ने गत सात मई को दर्ज एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) के आधार पर जाँच शुरू की थी। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दर्ज कई प्राथमिकियों से सामने आई थी। इन प्राथमिकियों में एक चल रही आपराधिक साज़िश का आरोप लगाया गया है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाज़ी, किसी और का रूप धारण करना और आपराधिक विश्वासघात शामिल है।
ईडी की जाँच में पता चला कि आरोपियों ने खुद को मूल एसआरएमएफ का अधिकृत पदाधिकारी होने का झूठा दावा करते हुए जाली पावर ऑफ़ अटॉर्नी, मनगढ़ंत बोर्ड प्रस्तावों और नकली प्राधिकरण पत्रों का इस्तेमाल करके ट्रस्ट की सैकड़ों करोड़ रुपये की कीमती संपत्तियों को अवैध रूप से बेच दिया।
उन्होंने बताया कि आरोपी जी. राम चंद्र मोहन को इस मामले में मुख्य साज़िशकर्ता और प्रमुख नियंत्रक के रूप में पहचाना गया है। 2010 में कथित तौर पर खुद को धोखाधड़ी से एसआरएमएफ कोषाध्यक्ष बताकर उसने उसी नाम से एक काल्पनिक संस्था बनाई, एक नकली पैन कार्ड हासिल किया जिसे बाद में आयकर विभाग ने “नकली करदाता” के रूप में निष्क्रिय कर दिया और अपराध से अर्जित धन को ठिकाने लगाने के लिए अवैध रूप से एक बैंक खाता खोला।
मोहन के करीबी सहयोगी आकाश मालवीय ने कथित तौर पर संस्था के एक कार्यकारी सदस्य के रुप में एक अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के तौर पर धोखाधड़ी वाले बिक्री विलेखों (सेल डीड्स) को पूरा करने में सक्रिय रूप से मदद की।
जाँच में ‘सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक प्रदीप सिंह की भी अपराध से अर्जित धन को उसकी पैसे के स्रोत को छिपाने (लेयरिंग) में कथित सक्रिय संलिप्तता का खुलासा हुआ है। यह कथित तौर पर जानते हुए भी कि बेची जा रही ज़मीन संस्था की थी और आरोपियों के पास उसे बेचने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था, प्रदीप सिंह ने जान-बूझकर इन धोखाधड़ी वाले लेन-देन में हिस्सा लिया। इससे भी ज़्यादा अहम बात यह है कि बिक्री के कागज़ात (सेल डीड) पर दस्तखत होने के तुरंत बाद, उन्होंने कथित तौर पर उसी संपत्ति के कुछ हिस्सों को तीसरे पक्षों को आगे बेचना शुरू कर दिया।
ईडी ने तलाशी की कार्रवाई के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा के तहत प्रदीप सिंह और सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉज़िट, लॉकर और महंगी गाड़ियों को सीज करने के आदेश जारी किए।
इन धोखाधड़ी वाले लेन-देन में मदद करने वाले अन्य लाभार्थियों और हिस्सेदारों की पहचान करने के लिए आगे की जाँच जारी है।
