स्थानीय ब्रह्मांड की दूरी का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है सुपरनोवा एसएन 2023 का विकास संबंधी व्यापक शोध

नयी दिल्ली,12 जून(वार्ता) पृथ्वी से लगभग 9.7 करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर स्थित स्पाइरल गैलेक्सी एनजीसी 2139 के किनारे वर्ष 2023 में खोजे गए ‘सुपरनोवा एसएन 2023’ का विकास संबंधी व्यापक शोध स्थानीय ब्रह्मांड की दूरी का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। सुपरनोवा ब्रह्मांड में होने वाले सबसे ज़बरदस्त विस्फोटों में से एक हैं। कोर-कोलैप्स सुपरनोवा ऐसे ही ब्रह्मांडीय विस्फोट हैं जो तब होते हैं जब कोई विशाल तारा अपना नाभिकीय ईंधन खत्म कर लेता है और गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के सामने खुद को संभाल नहीं पाता। यह नाटकीय अंत इतना चमकदार हो सकता है कि इसे दूर की गैलेक्सी में भी देखा जा सकता है। सुपरनोवा न केवल बहुत चमकदार होते हैं, बल्कि वे ब्रह्मांड के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं

क्योंकि वे विशाल पुनर्चक्रण केन्द्रों की तरह काम करते हैं; वे भारी तत्व बनाते और फैलाते हैं जो अंततः नए तारों, ग्रहों और यहां तक कि जीवन के लिए भी आधार बनते हैं।सुपरनोवा एसएन 2023 ‘का पता विस्फोट के एक दिन के भीतर ही चल गया था। ज़मीन और अंतरिक्ष में स्थित टेलीस्कोपों के ज़रिए इसका बड़े पैमाने पर फोटोमेट्रिक और स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन किया गया है। इस विस्तृत अध्ययन को ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित किया गया है। इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत आने वाले स्वायत्त संस्थान, ‘आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज’ की मोनालिसा दुबे, डॉ. कुंतल मिश्रा और नवीन डुकिया ने अन्य अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के साथ मिलकर तैयार किया है। यह पेपर एसएन के विकास के अलग-अलग चरणों का विस्तृत विश्लेषण करता है, जिसमें सटीक दूरी की माप भी शामिल है।

कोर-कोलैप्स सुपरनोवा का सबसे आम प्रकार है, जो तब होता है जब एक लाल अति विशाल तारा (सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 8-17 गुना) अपने जीवन के अंत तक पहुँचता है। जब तारे का आंतिरक भाग एक प्रोटो-न्यूट्रॉन तारे में ढह जाता है, तो बाहरी पदार्थ अंदर की ओर गिरता है और फिर सतह से टकराकर वापस उछलता है, जिससे एक शक्तिशाली शॉक वेव बनती है। जब शॉक सतह तक पहुँचता है, तो तारे की बाहरी परतें अलग हो जाती हैं और अंतरिक्ष में फैल जाती हैं। इसके तुरंत बाद सुपरनोवा सबसे चमकदार हो जाता है। जैसे-जैसे ये परतें फैलती रहती हैं, वे धीरे-धीरे ठंडी होती हैं और ऊर्जा खो देती हैं। इस चरण को शॉक कूलिंग कहा जाता है। इसके बाद कुछ महीनों तक चलने वाला एक चरण आता है जब सुपरनोवा अपारदर्शी रहता है।

कोर-कोलैप्स सुपरनोवा विशाल तारों के थर्मोन्यूक्लियर विकास के अंत में होने वाले नाटकीय विस्फोट हैं, जिनसे न्यूट्रॉन तारे और ब्लैक होल का जन्म होता है। ये ब्रह्मांड की सबसे ऊर्जावान घटनाओं में से हैं, रासायनिक तत्वों के निर्माण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, नए तारों के निर्माण को गति देते हैं, और रहस्यमय गामा-किरण विस्फोटों के एक उप-वर्ग से निकटता से संबंधित हैं। इसलिए, खगोल भौतिकविदों की इस बात को समझने में गहरी रुचि है कि कौन से तारे सुपरनोवा के रूप में विस्फोट करते हैं, कौन सी भौतिक प्रक्रियाएं विस्फोट का कारण बनती हैं, और इन विनाशकारी घटनाओं के कौन से प्रत्यक्ष परिणाम होते हैं। इस दौरान, इसकी ऊर्जा मुख्य रूप से तारे की बाहरी परतों में हाइड्रोजन के पुनर्संयोजन से आती है। चूँकि लाल अतिविशाल तारे में हाइड्रोजन का एक बड़ा आवरण होता है, इसलिए चमक लगभग स्थिर रहती है।

‘एक्सपैंडिंग फोटोस्फेरिक मेथड’ (ईपीएम) का इस्तेमाल करके सुपरनोवा की दूरी का अनुमान लगभग 27 मेगा पारसेक लगाया गया है। एक पारसेक लगभग 3.26 लाख प्रकाश वर्ष है। यह तरीका सुपरनोवा की फैलती हुई सतह के मूल आकार और उसकी चमक की तुलना करके दूरी का अनुमान लगाता है। यह तरीका खास तौर पर ‘आईआईपी’ सुपरनोवा के लिए बहुत अच्छा काम करता है, क्योंकि उनकी मोटी हाइड्रोजन परत एक साफ़ और व्यवस्थित सतह बनाती है जो ‘ब्लैकबॉडी रेडिएशन’ के नियमों का बारीकी से पालन करती है। इसके अलावा, उनके खास ‘प्लेटो फेज़’ (स्थिर चमक वाला चरण) से स्थिर और अनुमान लगाने योग्य स्थितियां मिलती हैं। इसके साथ ही, उनके अपेक्षाकृत सरल और हाइड्रोजन-प्रधान स्पेक्ट्रा से तापमान और फैलने की गति को ज़्यादा सटीकता से मापा जा सकता है।

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