नई दिल्ली | भारत के लिए गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय व्यापारिक साझेदार है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान से बना यह छह देशों का समूह भारत की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक विकास में बड़ी भूमिका निभाता है। भारत अपनी कच्चे तेल और एलएनजी की आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करते हैं।
आर्थिक और मानवीय संबंधों की गहराई
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और GCC के बीच 178.56 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार दर्ज किया गया है। व्यापार के अलावा, यहाँ रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक भारत की आर्थिक स्थिति में बड़ा योगदान देते हैं। इन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 में 52.44 अरब डॉलर की भारी रेमिटेंस भेजी, जो भारत को प्राप्त कुल रेमिटेंस का करीब 38 प्रतिशत है। साथ ही, सितंबर 2025 तक यहाँ से भारत में 31 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश आ चुका है।
मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में बढ़ते कदम
भारत और GCC के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक विस्तार देने के लिए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा जोरों पर है। दोनों पक्षों ने 24 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से एफटीए वार्ता शुरू करने की घोषणा की है। इस प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को दूर कर निवेश को बढ़ावा देना है, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यावसायिक संबंधों का एक नया और मजबूत अध्याय शुरू हो सके।

