लहूलुहान फरियादी को पुलिस ने लॉकअप में डाला, एफआईआर नहीं लिखी, अस्पताल में मौत

जबलपुर। बेलखेड़ा थाना अंतर्गत पिपरिया कला में उधारी के विवाद पर युवक की बेरहमी से पिटाई की और पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर करने के बजाए पीडि़त को ही घंटों लॉकअप में बंद रखकर प्रताडि़त किया। बाद में उसे अस्पताल भेज दिया। बुधवार सुबह अस्पताल में युवक की मौत हो गई। इसके बाद आक्रोश भडक़ गया। परिजन और ग्रामीण शव को लेकर थाने पहुंचे और शव को थाने के अंदर ही रख दिया और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। परिजनों ने आरेाप लगाया गया कि पुलिस ने घंटों पीडि़त को लॉकअप में बंद रखा। एफआईआर नहीं की और अस्पताल भेज दिया । पीडि़त को लॉकअप में बंद रखने से समय पर इलाज नहीं मिला जिसके चलते उसकी मौत हुई है।

पीडि़त उमेश घोषी (37), निवासी पिपरिया कला के अनुसार 8 जून की रात लगभग 9 बजे उनके छोटे भाई इंदर सिंह घोषी का गांव के चंदू लोधी, हेमराज लोधी, चरन सिंह लोधी और रामफल लोधी से उधारी के पैसों को लेकर विवाद हुआ था। उस समय उमेश ने बीच-बचाव किया और दोनों भाई घर लौट आए। रात करीब 10 बजे चारों आरोपी लाठी-डंडे और लोहे के राइजर पाइप लेकर उमेश के घर के आंगन में घुस गए और विवाद करने लगे। विरोध करने पर हेमराज और चंदू ने इंदर के हाथ पकड़ लिए और चरन लोधी ने राइजर पाइप से इंदर के सिर पर जोरदार हमला कर दिया। भाई को बचाने दौड़े उमेश पर रामफल ने डंडे से वार कर उसके बाएं हाथ की कोहनी और कलाई को चोटिल कर दिया। बीच-बचाव करने आई भाभी बिग्गो बाई को भी चरन लोधी ने पाइप से मारकर घायल कर दिया। वारदात के बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले थे।

3 घंटे लॉकअप में रखा, हालत बिगड़ी तो अस्पताल भेजा-

घटना के बाद परिजन गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ इंदर को लेकर तुरंत बेलखेड़ा थाने पहुंचे। दूसरा पक्ष भी थाने पहुंंचा जिसके इशारे पर पुलिस ने अपराधियों पर कार्रवाई करने की बजाय उल्टे पीडि़त पक्ष पर ही रौब झाड़ा। पुलिस ने इंदर की एफआईआर दर्ज नहीं की और उसे तड़पती हालत में 3 घंटे तक लॉकअप में बंद रखा। जब इंदर की हालत बेहद नाजुक हो गई, तब उसे अस्पताल भेजा गया था ।

एसपी से शिकायत तब एफआईआर-

मामले में पुलिस की टालमटोल का आलम यह था कि परिजनमंगलवार को एसपी ऑफिस के चक्कर काटने पड़े, जिसके बाद कहीं जाकर मामले की एफआईआर दर्ज हो सकी थी।

मौत के बाद फूटा गुस्सा

बुधवार की सुबह अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे इंदर सिंह ने आखिरकार दम तोड़ दिया। युवक की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों ग्रामीणों और परिजनों ने बेलखेड़ा थाने को घेर लिया। आक्रोशित लोग इंदर के शव को सीधे थाने के भीतर ले गए और उसे वहीं रखकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया है।

दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, आरोपियों पर हो कार्रवाई-

प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि इंदर की मौत चोटों से ज्यादा पुलिस की लापरवाही, उसे बेवजह लॉकअप में रखने और समय पर इलाज न मिलने के कारण हुई है। आक्रोशिजनों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए । स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सूचना पर वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे जिन्होंने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया जिसके बाद परिजन माने और प्रदर्शन समाप्त हुआ। इसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर रवाना हुए।

जांच के आदेश, हत्या की धारा बढेगी

पुलिस अधीक्षक से शिकायत के बाद पुलिस ने रिपोर्ट पर धारा 296(ए), 115(2), 118(1), 329(4), 351(2), 3(5) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया था। अब मौत के बाद मामले में हत्या की धाराएं बढेगी। एसडीओपी लोकेश डाबर ने बताया कि मामले में जांच के आदेश एसपी द्वारा दे दिए गए। हर एंगल पर तफ्तीश चल रही है जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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