धर्म का उद्देश्य है आत्मा की शुद्धता और चेतना की निर्मलता

भोपाल। बाबड़िया कला में आयोजित प्रवचन में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि धर्म संकट को टालने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मबल और स्थिरता का मार्ग है। धर्म के वास्तविक प्रयोजन पर बोलते हुए उन्होंने आत्म-जागृति और आत्म-परिचय को मोक्ष मार्ग की शुरुआत बताया। मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि धर्म का उद्देश्य परंपरा निभाना, संकट टालना या पुण्य कमाना नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धता और चेतना की निर्मलता है। उन्होंने प्रेरणा दी कि धर्म जीवन को पुण्यमय बनाए, न कि केवल परलोक की चिंता करे।

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