जेडी वेंस : इजरायल को पसंद आए या नहीं, ईरान के साथ बातचीत अमेरिकी जनता के लिए ‘कामयाबी’

वॉशिंगटन, 9 जून (वार्ता) अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार को कहा कि शांति समझौते के लिए ईरान के साथ चल रही बातचीत “अमेरिकी जनता के लिए एक बड़ी कामयाबी” है, भले ही इस पर इजरायल की सोच कुछ भी हो।

उपराष्ट्रपति की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने में अब सिर्फ दो या तीन दिन का समय बचा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात से भी साफ इनकार किया था कि ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई अमेरिकी इच्छाशक्ति की अवहेलना थी।

फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका और इजरायल की प्राथमिकताओं में अंतर को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि हालांकि दोनों देशों के “कई साझा हित हैं”, लेकिन फिर भी “कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जहां हमारे हित अलग हो जाते हैं।”

श्री वेंस ने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ने यहां बहुत स्पष्ट कर दिया है कि भले ही इजरायल के अपने कुछ निश्चित उद्देश्य हों, लेकिन ईरान के मामले में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हो।”

उन्होंने दावा किया कि श्री ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद व्हाइट हाउस ने एक ऐसे परमाणु समझौते के लिए “रास्ता तैयार किया है” जो वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक सरकार के दौरान हुए समझौते से कहीं बेहतर होगा। उपराष्ट्रपति ने कहा, “अब, इजरायल को यह पसंद आ सकता है या नहीं भी आ सकता है। लेकिन बुनियादी तौर पर, हमारा मानना है कि यह अमेरिका के सर्वोत्तम हित में है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि ईरान, अमेरिका के साथ “चाल चलने” की कोशिश कर रहा है, श्री वेंस ने केवल इतना कहा, “हर कोई हमेशा हर किसी के साथ चाल चलने की कोशिश करता है।”

श्री वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा तैयार किया जा रहा यह नया समझौता ओबामा के कार्यकाल के समझौते से बेहतर है क्योंकि पुराने समझौते में यह सुनिश्चित करने के लिए “उचित निरीक्षण प्रणाली” की कमी थी कि ईरानी कभी परमाणु हथियार न बना सकें।

उन्होंने कहा, “तब जो हुआ था और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति अब जिस मुकाम पर पहुंचेंगे, उन दोनों में यही एक बड़ा अंतर है।” उन्होंने कहा, “हमारा रवैया यह रहेगा कि ‘राष्ट्रपति के मिशन को पूरा किया जाए, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह सत्यापित किया जाए कि ईरानी समझौते के अपने हिस्से का पालन कर रहे हैं या नहीं।’ यह एक कठिन काम है, लेकिन राष्ट्रपति ने हमें इसे हासिल करने के लिए एक अच्छी स्थिति में ला दिया है।”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि यह युद्ध आगे जारी रहे, क्योंकि यह किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ईरान भी अब इस हकीकत को समझने लगा है कि “बातचीत की मेज पर आना और कुछ ठोस प्रस्ताव सामने रखना ही विकल्प है।” उन्होंने कहा, “हम निश्चित रूप से इसकी पूरी जांच करेंगे, लेकिन अगर हमें यह समझौता मिल जाता है, तो यह अमेरिकी जनता के लिए एक बड़ी जीत होगी।”

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