
जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस प्रणय वर्मा व जस्टिस जेके पिल्लई की युगलपीठ ने नाबालिग बेटी को पिता को सौंपने का आदेश सुनाया। इसी के साथ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण कर दिया। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाकर्ता सागर निवासी जगदीश अठिया की ओर से दलील दी कि नाबालिग बेटी की आयु 15 वर्ष है। वह लापता हो गई थी। जिसकी शिकायत पुलिस में की गई। जिसके बावजूद पुलिस तलाश नहीं कर रही थी। इसीलिए हाईकोर्ट आना पड़ा। न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने नाबालिग को तलाश कर पेश किया। जहां उसके बयान को रिकार्ड पर लेने के साथ ही नाबालिग को पिता को सौंप जाने का राहतकारी आदेश पारित कर दिया गया। इसी के साथ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया।
