दुष्कर्म पीडि़ता ने गर्भपात से किया इंकार, हाईकोर्ट ने मां बनने की दी अनुमति

जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस आरके वाणी की ग्रीष्म अवकाश कालीन पीठ ने दुष्कर्म से गर्भवती हुई एक नाबालिग पीडि़ता के मामले में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसे बच्चें को जन्म देने की अनुमति प्रदान कर दी है। साथ ही राज्य शासन को निर्देशित किया है कि नवजात के 16 वर्ष की आयु तक उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतों का खर्च वहन किया जाए।

न्यायालय ने उक्त आदेश खरगौन जिले के बालकवाड़ा थाना क्षेत्र से जुड़े एक पाक्सो प्रकरण में पारित किया। गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक होने तथा पीडि़ता के नाबालिग होने के कारण मंडलेश्वर स्थित विशेष पाक्सो न्यायालय ने मार्गदर्शन हेतु प्रकरण हाईकोर्ट को प्रेषित किया था, जिस पर संज्ञान लेकर सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान पीडि़ता अपने माता-पिता के साथ न्यायालय में उपस्थित हुई। न्यायालय के समक्ष उसने स्पष्ट कहा कि वह गर्भपात नहीं कराना चाहती और बच्चें को जन्म देना चाहती है। उसके माता-पिता ने भी इस निर्णय का समर्थन किया। पीडि़ता एवं उसके परिवार की इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए हाईकोर्ट ने गर्भ समापन संबंधी कार्यवाही समाप्त कर दी। साथ ही राज्य सरकार और जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद मां और नवजात को समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उपचार, प्रसव और पोषण से जुड़े सभी खर्च भी राज्य सरकार वहन करेगी।

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