दिल्ली से आए विद्यार्थियों ने किया ओंकारेश्वर की प्राचीन धरोहरों का गहन अध्ययन 

ओंकारेश्वर । मध्यप्रदेश की पावन तीर्थनगरी ओंकारेश्वर इन दिनों शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के अध्ययन का केंद्र बना हुआ है। नई दिल्ली स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर की असिस्टेंट प्रोफेसर टी. लक्ष्मी प्रिया के नेतृत्व में 15 विद्यार्थियों का दल यहां पहुंचा, जिन्होंने नगर की प्राचीन धरोहरों और पुरातात्विक महत्व को गहराई से समझने का प्रयास किया। इस रिसर्च यात्रा में विद्यार्थियों को नगर परिषद ओंकारेश्वर की पूरी टीम का सहयोग मिला। ओंकारेश्वर नगर परिषद सीएमओ संजय गीते के निर्देशन में परिषद कर्मचारी एवं अधिकारी दल का मार्गदर्शन कर रहे हैं। टीम में ज्योति मैडम और सीमा मैडम सहित नगर परिषद के अन्य सदस्य भी सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिन्होंने छात्रों को अलग-अलग स्थलों की जानकारी दी। टी. लक्ष्मी प्रिया ने बताया कि विद्यार्थी ओंकारेश्वर को एक रिसर्च एरिया के रूप में अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा हम यहां के प्राचीन मंदिरों, धर्मशालाओं, बाजारों और स्थानीय संस्कृति का महत्व समझना चाहते हैं। हमारे बच्चे मैप लेकर आए हैं और इस नगर के हेरिटेज को चिह्नित कर रहे हैं। यह अध्ययन हमें बताता है कि यहां के लोग नदी, संस्कृति और लैंडस्केप से कितने गहरे जुड़े हुए हैं। अब तक विद्यार्थियों ने नगर परिषद की टीम के साथ डैम पार कर द्वीप क्षेत्र का भ्रमण किया। यहां उन्होंने पशुपतिनाथ मंदिर, 24 अवतार मंदिर, जैन मंदिर समेत कई प्राचीन धरोहरों को देखा। इसके अलावा छात्रों ने तालाबों के किनारे मौजूद लोगों से चर्चा की और उनके अनुभवों को अपने रिसर्च कार्य में शामिल किया। विद्यार्थियों ने इस दौरान ओंकारेश्वर एवं ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी किए। उन्होंने इन दोनों प्राचीन मंदिरों की ऐतिहासिक, धार्मिक और स्थापत्य विशेषताओं का अध्ययन किया। टीम ने यह भी समझने का प्रयास किया कि कैसे यहां की संस्कृति और धार्मिक मान्यताएं समय के साथ लोगों की जीवनशैली और नगर की संरचना से जुड़ी हुई हैं। विद्यार्थियों का मानना है कि ओंकारेश्वर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां की धरोहरें हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करती हैं। शोध का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि किस प्रकार स्थानीय समाज और नगर परिषद मिलकर इन धरोहरों को संरक्षित कर सकते हैं ताकि आने वाली पीढिय़ों तक यह अमूल्य विरासत सुरक्षित रह सके। इस रिसर्च यात्रा में अभिनया, सुजीथा, सरोवश, श्रृष्टि,शुभम,कैलास,देव किरण,विष्णु प्रिया,प्रेरणा, कौमुदी, नैनीका, डिंपल, जसप्रीत, मेघना और सुमेधा विद्यार्थी शामिल हैं ।

Next Post

तेज बारिश से उफने नदी-नालों ने लांघे तटबंध

Thu Sep 4 , 2025
सीहोर।आखिर एक दिन पहले फिर सक्रिय हुए बादलों ने झमाझम बरसते हुए जिले को तरबतर कर दिया. सभी तहसीलों में हुई मूसलाधार बारिश के चलते नदी- नाले उफान पर आ गए और किनारों को लांघते हुए पानी गांवों की सरहद तक जा पहुंचा. पुल- पुलियाओं पर पानी होने के कारण […]

You May Like