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भोपाल। नगर निगम द्वारा शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को नए स्वरूप में ढालने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस क्रम में अब अशोका गार्डन क्षेत्र का नाम बदलकर ‘राम बाग’ किए जाने का प्रस्ताव नगर निगम की मेयर इन काउंसिल की बैठक में पारित किया गया है। इस प्रस्ताव को अब राज्य सरकार की स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
नगर निगम द्वारा यह कदम उन इलाकों और संस्थानों के नामों को बदलने की व्यापक मुहिम का हिस्सा बताया जा रहा है, जिनके नाम ऐतिहासिक या धार्मिक दृष्टि से वर्तमान जनभावनाओं के अनुरूप नहीं माने जाते। इससे पहले हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘रानी कमलापति रेलवे स्टेशन’ कर दिया गया था। इसी तरह हमीदिया कॉलेज और हमीदिया अस्पताल का नाम बदलने की प्रक्रिया भी विचाराधीन है।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, ‘राम बाग’ नाम न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को भी मजबूत करेगा। बताया गया कि स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस नाम परिवर्तन की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
हालांकि, शहर में नाम बदलने की इस मुहिम को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ इसे सांस्कृतिक पुनर्स्थापन का प्रयास मान रहे हैं, तो कुछ इसे महज राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही कवायद बता रहे हैं।
राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अशोका गार्डन आधिकारिक रूप से ‘राम बाग’ के नाम से जाना जाएगा, और इसके बाद शहर के नक्शे, शासकीय दस्तावेजों और पहचान पत्रों में भी यह बदलाव लागू किया जाएगा।
इस प्रक्रिया को लेकर नगर निगम का कहना है कि भोपाल की सांस्कृतिक विरासत और जनभावनाओं के अनुरूप नामकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
