राजेश एक्सपोर्ट्स का बड़ा बयान: राजस्व हेरफेर के आरोपों को किया खारिज, 400 GB दस्तावेज पुनः सेबी को सौंपेगी कंपनी, शेयरधारकों को भरोसा

नई दिल्ली | भारत की प्रमुख ज्वेलरी एक्सपोर्ट कंपनी ‘राजेश एक्सपोर्ट्स’ ने सेबी द्वारा लगाए गए राजस्व हेरफेर के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। कंपनी का कहना है कि यह विवाद केवल डेटा को समझने की एक बड़ी तकनीकी भूल के कारण उत्पन्न हुआ है। चेयरमैन राजेश मेहता ने स्पष्ट किया कि सेबी ने कंपनी के मुनाफे (EBITDA) को ही कुल राजस्व मान लिया है, जबकि वास्तविक बिक्री के आंकड़े पूरी तरह सही हैं।

पुनः जमा किए जाएंगे दस्तावेज

कंपनी अगले 15 दिनों के भीतर सेबी को 300 से 400 गीगाबाइट (GB) के दस्तावेज पुनः सौंपेगी, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। प्रबंधन का कहना है कि लाखों पन्नों के ये रिकॉर्ड पहले भी साझा किए गए थे, लेकिन जांच के दौरान तकनीकी जटिलताओं के कारण गलतफहमी हुई। चेयरमैन ने भरोसा दिलाया कि उनकी कंपनी पूरी तरह कर्ज-मुक्त है और प्रमोटरों द्वारा किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी नहीं की गई है।

निवेशकों और सरकार की नजर

सेबी के आदेश के बाद कंपनी के शेयरों में आई भारी गिरावट से निवेशकों और एलआईसी जैसी संस्थाओं को झटका लगा है। साथ ही, भारी उद्योग मंत्रालय भी पीएलआई बैटरी योजना को लेकर मामले की समीक्षा कर रहा है। राजेश मेहता ने अपने सभी शेयरधारकों को आश्वस्त किया है कि ऑडिट प्रक्रिया पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और कंपनी अपनी साख पुनः हासिल कर लेगी।

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