पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत के अहम योगदान हैंः जोशी

गदग/पुणे, (वार्ता) केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

राज्य गदग जिले के नरगुंड तालुक के वासन गांव में स्वयं संजीवनी आश्रम में बीवीजी वेलनेस सेंटर – कैंसर उपचार केंद्र का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए श्री जोशी ने पारंपरिक चिकित्सा के अत्यधिक ऐतिहासिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद न केवल बीमारियों का इलाज करता है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखकर लोगों को लंबे और स्वस्थ जीवन की ओर भी ले जाता है।

उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से चली आ रही आयुर्वेद पद्धति का महत्व हाल के वर्षों में बढ़ा है, जिसका कारण इसकी जड़ी-बूटियों और समग्र उपचार पद्धतियों का विशाल भंडार है। बीवीजी लाइफ साइंसेज और हनुमंत मल्लाली के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल एक महत्वपूर्ण संस्थान बननी चाहिए, जहां मरीजों को प्रभावी इलाज मिले और वे बेहतर स्वास्थ्य और खुशी के साथ घर लौटें।सभा को संबोधित करते हुए बीवीजी जीवन विज्ञान के संस्थापक हनुमंतराव गायकवाड़ ने कहा कि संगठन ने व्यापक शोध के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि संगठन का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को।

कार्यक्रम में बोलते हुए हनुमंत मल्लाली ने कहा कि आयुर्वेद जड़ी-बूटियों, पंचकर्म चिकित्सा, योग और न्यूट्रास्युटिकल उत्पादों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर फैला है। उन्होंने आगे बताया कि बीवीजी जीवन विज्ञान ने कैंसर के इलाज के क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञों और शोध विशेषज्ञों के साथ सहयोग किया है, जिससे इस विशेष उपचार केंद्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

 

 

 

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