जनता की बिजली पर कार्पोरेट कब्जे की साजिश: विक्रम

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस ने उन रिपोर्टों की कड़ी निंदा की है, जिनमें कहा गया है कि केंद्र सरकार बिजली वितरण के निजीकरण से इनकार करने वाले राज्यों की ग्रांट (अनुदान) रोकने की धमकी दे रही है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने इसे “जनता की संपत्ति को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की खुली साज़िश” बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति पूंजीपतियों के हित में और आम नागरिकों के खिलाफ़ है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि केंद्र का यह रवैया संविधान की संघीय व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। वित्तीय दबाव डालकर राज्यों पर निजीकरण थोपना न केवल अलोकतांत्रिक है बल्कि आम जनता के साथ विश्वासघात भी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि बिजली क्षेत्र, जो जनता के टैक्स के पैसों से विकसित हुआ है, को निजी कंपनियों को सौंपना जनसेवा की भावना पर कुठाराघात है। इससे बिजली दरों में वृद्धि, ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा और गरीब उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा, “51 या 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के नाम पर सार्वजनिक संपत्तियों को बेचना सीधी लूट है।”

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बिजली निजीकरण से किसानों को मिलने वाली रियायती दरें खत्म हो जाएंगी, जिससे कृषि लागत बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि “भाजपा सरकारें जनता की संपत्ति बेचकर अपने पूंजीपति मित्रों की तिजोरियां भर रही हैं, जबकि जनता महंगाई और बेरोज़गारी से त्रस्त है।”

डॉ. चौधरी ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह तत्काल इस जनविरोधी निजीकरण प्रस्ताव को वापस ले और किसानों, मजदूरों व आम उपभोक्ताओं को सस्ती और भरोसेमंद बिजली की गारंटी दे।

उन्होंने कहा, “रेलवे, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के बाद अब भाजपा सरकार जनता की बिजली को बेचने की तैयारी में है, लेकिन कांग्रेस इसे किसी भी कीमत पर होने नहीं देगी। यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी।”

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