विदिशा: जिले के कई गांव ऐसे भी जहां पर आज तक मुक्तिधाम का निर्माण ही नहीं हुआ है या हुआ है तो वहां पर अंतिम संस्कार के लिए पुख्ता इंतजाम तक नहीं किए गए हैं. ऐसा की मामला शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित कराखेड़ी गांव से सामने आया है जहां पर आज
भी बारिश में होती है सबसे ज्यादा परेशानी
अभी हाल ही में ग्राम कराखेड़ी के रहने वाले एक युवक की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. जिसका अंतिम संस्कार गांव के बाहर खेत में खुले आसमान के नीचे किया गया था. जब इस बारे में जानकारी ली गई तो मालूम चला की मुक्तिधाम की जमीन का विवाद चल रहा है जिसके चलते खुले आसमान
तक मुक्तिधाम ही नहीं बन सका ऐसे में गांव में होने वाले
में अंतिम संस्कार किया जा रहा है. सबसे ज्यादा परेशान बारिश के दौरान आती है. गांव वालों को बारिश में तिरपाल का सहारा लेकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है. वहीं जहां निजी जमीन पर अंतिम संस्कार होता वहां पर पहुंचने के लिए खेत के बीच से जाना पड़ता है.
अंतिम संस्कार के लिए निजी जमीन पर ही दाह संस्कार
नहीं हो पाया टीनशेड मेन रोड पर है जमीन
गांव वालों ने बताया कि कई साल पहले यह बताया गया था कि गांव के अंदर ही सड़क किनारे मुक्तिधाम के लिए जमीन एलॉट की गई थी लेकिन जमीन निजी और सरकारी कागजों में उलझकर रह गई जिसके चलते यहां पर टीन शेड का
करना गांव वालों की मजबूरी बन गया है. इस गांव में सबसे ज्यादा आबादी दांगी समाज की है. कई सालों से गांव में मुक्तिधाम के निर्माण का इंतजार किया जा रहा है लेकिन निर्माण नहीं हो सका.
ग्रामीणों बताया कि पिछले कई दशकों से गांव से थोड़ी ही दूर पर निजी जमीन है जहां पर अंतिम संस्कार होता आ रहा है युवा पीड़ी को तो यह भी नहीं मालूम की गांव में मुक्तिधाम है कि नहीं. गांव के रहने वाले 58 साल के यशपाल सिंह दांगी ने भी निर्माण नहीं किया गया. मुक्तिधाम का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. कई बार गांव वालों ने यह मुद्दा उठाया लेकिन जमीन के विवाद को सुलझाने में किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई जिसके चलते यह हालात बने हैं.
बताया कि जब से होश संभाला है तब से गांव के बाहर ही एक खेत में अंतिम संस्कार होता देखते आ रहे हैं. यहां पर शुरू से ही एक खेत में अंतिम संस्कार होता है. वहीं गांव के रहने वाले रज्जू दांगी ने बताया कि गांव में मुक्तिधाम के लिए जो जमीन है वह कई सालों से विवादों में उलझी हुई है, जमीन के विवाद को सुलझाने की आज तक कोई ठोस पहल ही नहीं की गई शायद यही वजह है कि गांव में मुक्तिधाम नहीं बन सका है
