
नयी दिल्ली, 06 जून (वार्ता) पर्यावरण एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग तो बस शुरुआत है और असली मकसद शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है।
नीट, सीयूईटी, सीबीएसई और एसएससी जीडी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफ़े की मांग करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का विरोध प्रदर्शन शनिवार को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में सैकड़ों समर्थकों ने हिस्सा लिया, जिनमें विद्यार्थी और युवा नौकरीपेशा लोग भी शामिल थे। यहां सीजेपी प्रदर्शन के विरोध में भी कुछ लोगों ने नारेबाजी की, हालांकि दिल्ली पुलिस ने छह लोगों को हिरासत में ले लिया और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
दिल्ली पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर सीधे एकत्र होने की एक बार की छूट दी थी। पूरी राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किये गये थे और कई जगह बीएनएसएस की धारा 163 (सार्वजनिक उपद्रव, संभावित खतरे, या सार्वजनिक सुरक्षा एवं शांति के खतरों को रोकने के लिए तत्काल और अस्थायी आदेश) लागू की गयी थी।
इस प्रदर्शन में समर्थन देने के लिए शामिल हुए श्री वांगचुक ने कहा कि वह इस मकसद के लिए अपना समर्थन जारी रखते हुए अगले सप्ताहांत फिर से जंतर-मंतर आयेंगे। विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर “सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनना चाहिये” के नारे सुनाई दिये।
उन्होंने कहा, “इस्तीफ़े की मांग तो बस शुरुआत है। हमारा मुख्य मकसद पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना है। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक तो असल में एक बहुत बड़ी समस्या के लक्षण भर हैं। पारदर्शिता, जवाबदेही और सभी के लिए अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी व्यवस्था में बड़े सुधारों की ज़रूरत है।”
श्री वांगचुक ने ‘सीजेपी’ के बैनर तले युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन का पुरज़ोर समर्थन किया है। इससे पहले, उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि अगर दिपके को गिरफ़्तार किया जाता है, तो वह छह हफ़्ते के लिए अनशन पर बैठेंगे।
इससे पू्र्व, श्री दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी किसी पूर्व-नियोजित राजनीतिक रणनीति की उपज नहीं, बल्कि वह सरकार से नाराज लोगों की आवाज बनकर उभरी है और कुछ ही दिनों में लाखों लोग उससे जुड़ चुके हैं।
श्री दिपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जनता को हिंदू-मुस्लिम मुद्दों में उलझाकर रखा है, जबकि असली सवाल रोजगार, आजीविका और आम लोगों की समस्याओं का है।
उन्होंने कहा, “पिछले पिछले 10-12 वर्षों से हमें हिन्दू-मुस्लिम में उलझाकर रखा गया। क्या हिंदू-मुस्लिम से नौकरियां मिल रही हैं? क्या हिंदू-मुस्लिम की राजनीति से लोगों के घर अच्छी तरह से चल रहे हैं? आखिर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति से फायदा किसे हो रहा है?”
श्री दिपके ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाये रखने की अपील करते हुए कहा कि कई ताकतें इस आंदोलन को विफल देखना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “पिछले पांच दिनों से मैं लगातार आग्रह कर रहा हूं कि हमारा विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे। यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस आंदोलन को विफल न होने दें।”
उन्होंने दावा किया कि सरकार के खिलाफ बोलने वाले युवाओं और उनके परिवारों में भय का माहौल बनाया जा रहा है। श्री दिपके ने कहा, “जब मैं अमेरिका से भारत लौट रहा था, तब मेरी मां रो रही थीं। उन्हें डर था कि सरकार मुझे जेल में डाल देगी। यह केवल मेरी मां का डर नहीं है, बल्कि हर उस मां का डर है जिसका बेटा सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है।”
उन्होंने कहा कि लोगों को यह संदेश देना जरूरी है कि वे डर की राजनीति से घबराने वाले नहीं हैं। श्री दिपके ने कहा कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर अभियान शुरू हुए एक महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया, “हम पिछले एक महीने से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं लेकिन ये लोग ध्यान भटकाने में लगे हैं। हमारे सोशल मीडिया अकाउंट हैक किये जा रहे हैं और पोस्ट हटवाई जा रही हैं। आप हमारी पोस्ट तो डिलीट कर सकते हैं, लेकिन हमें इस जगह से मिटा नहीं सकते।”
इस बीच, सीजेपी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “लोग पूछते हैं कि आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकालने से क्या हासिल होता है? इससे यह साबित होता है कि हम ज़िंदा हैं।”
पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। एयरपोर्ट और विरोध स्थल सहित कई अहम जगहों पर 1,000 से ज़्यादा पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे। अधिकारियों ने प्रदर्शन में शामिल अहम लोगों पर भी नज़र रखी। कार्यक्रम में बोलने वालों ने विरोध के शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों पर ज़ोर दिया और आयोजकों ने बार-बार लोगों से अनुशासन बनाये रखने की अपील की।
श्री दिपके ने अपने भाषण में कहा कि इस आंदोलन का मकसद परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है और उन्होंने आलोचकों पर ऑनलाइन विरोध की आवाज़ दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद, आयोजकों ने संकेत दिया कि अपनी मांगों पर सरकार के रुख के आधार पर आने वाले दिनों में और प्रदर्शन किये जा सकते हैं।
इस पार्टी ने अपना नाम उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी से लिया है जिसमें उन्होंने एक याचिका की सुनवायी के दौरान न्यायालय और सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर या आरटीआई कार्यकर्ता बन कर दूसरों पर हमला करने वालों को ‘कॉकरोच’ की संज्ञा दी थी।
