वॉशिंगटन, 06 जून (वार्ता) अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के खिलाफ बड़ी आर्थिक कार्रवाई करते हुए उसके एक ‘संगठित नेटवर्क’ पर नये प्रतिबंधों का एलान किया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह नेटवर्क ‘अवैध ऊर्जा व्यापार और वैश्विक वित्तीय धोखाधड़ी’ में लिप्त था। इसके जरिये दक्षिण और पूर्वी एशिया के बाजारों में करोड़ों डॉलर मूल्य की ईरानी एलपीजी की तस्करी की जा रही थी। अमेरिकी विदेश और वित्त मंत्रालय के जारी बयानों के मुताबिक ईरान इसे ओमान जैसे तीसरे देशों का बताकर बेच रहा था। इस पूरे खेल को छिपाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और चीन में सक्रिय मुखौटा कंपनियों के साथ-साथ ईरान के जहाजों के लिए छद्म बेड़े का इस्तेमाल किया जा रहा था। ये जहाज अपनी पहचान और ईंधन के ईरानी मूल को छिपाकर परिवहन कर रहे थे, जो अमेरिकी प्रतिबंधों (कार्यकारी आदेश 13902) का सीधा उल्लंघन है।
इस कार्रवाई के तहत सिर्फ ईंधन तस्करी ही नहीं, बल्कि ईरान के एक बड़े मुद्रा विनिमय नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है। विदेश मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता थॉमस टॉमी पिगॉट ने बताया, “हम ईरान के एक मुद्रा विनिमय केंद्र और उसके ऑपरेटरों पर भी प्रतिबंध लगा रहे हैं, जो अन्य तत्वों के साथ मिलकर ईरान को अरबों डॉलर के अवैध वित्तीय लेनदेन में मदद कर रहे थे।” वित्त मंत्रालय के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (ओएफएसी) ने ‘मेहरदाद गेरामियन निक एंड पार्टनर्स कंपनी’ नामक विनमय केंद्र पर प्रतिबंध लगाया है। इस नेटवर्क ने विदेशी बिचौलियों और शेल कंपनियों के माध्यम से प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरानी बैंकों की तरफ से करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा इधर से उधर की थी। हाल ही में ओएफएसी ने ऐसे ही कई ब्रोकर नेटवर्कों (जैसे रादिन एक्सचेंज, अर्ज़ ईरान एक्सचेंज, ओपल एक्सचेंज और अमीन एक्सचेंज) को ध्वस्त किया है।
यह कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के व्यापक ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ अभियान का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को पंगु बनाना है, जिसके दम पर वह अपनी सेना के लिए फंड जुटाता है, क्षेत्रीय छद्म गुटों का समर्थन करता है और परमाणु एवं हथियार विकास कार्यक्रमों को हवा देता है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने इस अभियान पर कहा, “इकोनॉमिक फ्यूरी से हम ईरान के छद्म बैंकिंग प्रणाली और अवैध व्यापारिक मार्गों को काटना जारी रखेंगे।” अधिकारियों का कहना है कि ये वित्तीय रास्ते ईरान के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंचने की जीवनरेखा बन चुके थे, जिन्हें रोकने के लिए विदेशी नागरिकता कार्यक्रमों और ऑफशोर कॉर्पोरेट ढांचों पर भी नजर रखी जा रही है।
इस कार्रवाई के समानांतर ओएफएसी ने पनामा, पलाऊ और सेंट किट्स एंड नेविस जैसे देशों के झंडे तले चल रहे कई जहाजों और शिपिंग कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया है। मार्शल द्वीप समूह में स्थित कई शिपिंग कंपनियों पर भी इन संदिग्ध जहाजों के संचालन का आरोप लगा है। अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन प्रतिबंधों को लागू करने में सहयोग की अपील की है। साथ ही विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को कड़ी चेतावनी दी गयी है कि यदि उन्होंने प्रतिबंधित नेटवर्कों के साथ सहयोग जारी रखा तो उन्हें भी द्वितीयक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी प्रतिबंध कानूनों के तहत, अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली इन सभी प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्तियों को जब्त कर दिया गया है और किसी भी अमेरिकी नागरिक को इनके साथ लेनदेन की सख्त मनाही है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन प्रतिबंधों का अंतिम उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि ईरान के व्यवहार में बदलाव लाना है।

