हैदराबाद, 06 जून (वार्ता) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की। उन्होंने उन खबरों पर सवाल उठाये हैं, जिनमें कहा गया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के राशन और अन्य कल्याणकारी लाभों को मतदाता सूची से जोड़ा जा रहा है।
‘एक्स’ पर पोस्ट में श्री ओवैसी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में जिन लोगों को ‘अनुपस्थित’ या ‘स्थानांतरित’ चिह्नित किया गया है, साथ ही जिन्हें पिछले चुनाव के दौरान वोटर स्लिप नहीं मिली थी, उन्हें वास्तविक और पात्र नागरिक होने के बावजूद कल्याणकारी योजनाओं से बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने कल्याणकारी लाभ पाने के लिए मतदाता सूची को आधार मानने के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब सत्यापन तंत्र के रूप में आधार-आधारित प्रमाणीकरण पहले से ही मौजूद है, तो इसकी क्या जरूरत है।
श्री ओवैसी ने कहा, “सरकारी योजनाएं मतदाताओं के लिए कोई इनाम नहीं हैं। ये सभी योग्य नागरिकों के लिए हैं।” उन्होंने कहा कि कल्याणकारी लाभों को मतदाता सूची से जोड़ना सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के उद्देश्य को कमजोर करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अल्पसंख्यकों सहित वंचित तबकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। उन्होंने इसे सत्यापन के बहाने लाभार्थियों की संख्या कम करने का प्रयास बताया।
श्री ओवैसी ने कहा कि कल्याणकारी योजनाएं जनता के पैसे से चलती हैं और इन्हें विवेकाधीन लाभ के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन योजनाओं तक पहुंच सभी योग्य नागरिकों का अधिकार है।
उन्होंने कल्याणकारी लाभों के वितरण के राजनीतिकरण की भी आलोचना की और कहा कि प्रशासनिक फैसले समाज के सबसे गरीब तबकों के जीवन को और मुश्किल बना रहे हैं।
